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पीढ़ी अंतराल पर निबंध (जनरेशन गैप) Essay on Generation Gap in Hindi

पीढ़ी अंतराल पर निबंध (जनरेशन गैप) Essay on Generation Gap in Hindi

इया लेख में आप जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल पर निबंध Essay on Generation Gap in Hindi पढ़ेंगे। इसमे आप जनरेशन गैप क्या है, इसके प्रभाव, कम करने के उपाय के विषय में जानकारी लिखा है।

Table of Content

आईए पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गैप) पर निबंध शुरू करते हैं…

पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गैप) क्या है? Generation Gap Meaning in Hindi

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। युवा माता पिता संतान उत्पत्ति करके वृद्ध हो जाते हैं और उनके बच्चे युवा हो जाते हैं। कई बार देखा गया है कि वृद्ध माता-पिता और युवा बच्चों की सोच में बहुत फर्क होता है। इसे ही पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गैप) कहते हैं।

बहुत बार माता पिता और बच्चों में विभिन्न सोच के चलते आपसी टकराव और मतभेद हो जाता है। धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, नैतिक मूल्य जैसे अनेक विषयों में अंतर हो जाता है।

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) चर्चा Discussion About Generation Gap in Hindi

बहुत बार बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता बहुत सुस्त, दकियानूसी और धीमी सोच का अनुसरण कर रहे हैं। पीढ़ी अंतराल के अनेक उदाहरण हमें रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलते हैं। बच्चे जहां तेज रफ्तार पॉप संगीत सुनना चाहते हैं वही माता पिता धार्मिक भजन और गीत सुनना चाहते हैं।

जहां माता पिता पैसों को बचाने की सलाह देते हैं तो युवा पीढ़ी इसे खर्च करने पर जोर देती है। माता पिता धार्मिक और पूजा पाठ में मन लगाने की सलाह देते हैं तो युवा पीढ़ी अपना अधिकतर समय मौज मस्ती और मनोरंजन में व्यतीत करती है। दोनों पीढ़ियों में जमीन आसमान का फर्क दिखने लग जाता है। धीरे-धीरे यह टकराव पर पहुंच जाता है।

आजकल की नई नवेली बहु अपनी सास का सम्मान नहीं करती है क्योंकि वो 56 तरह का देसी, विदेशी, कॉन्टिनेंटल, थाई और तरह तरह का खाना पकाना जानती हैं। वहीं सास पुराने तरीके से खाना बनाती है। माता पिता की रोक टोक को बच्चे एक भयंकर जाल की तरह देखते हैं।

वह आजादी पाना चाहते हैं। वह किसी भी तरह की रोक टोक भरा जीवन नहीं जीना चाहते हैं। इसलिए हमारे देश में धीरे धीरे एकल परिवार की परंपरा बढ़ रही है। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं जो कि बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। सच्चाई है कि माता-पिता सदैव अपने बच्चों का भला चाहते हैं। इस बात को युवा पीढ़ी नहीं समझ पाती है।  

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) के प्रभाव Effect of Generation Gap in Hindi

1. एकल परिवार को बढ़ावा देता है.

पीढ़ी अंतराल के कारण युवा और वृद्ध पीढ़ियों की सोच में अंतर है, इसलिए संयुक्त परिवार टूट जाता है। युवा पति पत्नी कहीं और जाकर रहने लग जाते हैं। वे स्वच्छंद और आजादी भरा जीवन जीना चाहते हैं। वे किसी भी प्रकार की रोक टोक नहीं चाहते हैं।

2. युवा पीढ़ी बड़ों का सम्मान नहीं करती है

पीढ़ी अंतराल की सबसे बुरी बात यह है की आज की युवा पीढ़ी अपने आप को श्रेष्ठ समझती है। यह संभव भी हो सकता है परंतु हमें हर हालत में बड़ों का सम्मान करना चाहिए।

आजकल की ज्यादातर नवविवाहिता बहुये अपने सास ससुर का सम्मान नहीं करती। छोटे भाई अपने बड़े भाइयों का सम्मान नहीं करते है। पुत्र अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता। इस तरह से समाज पतन की ओर जा रहा है।

3. युवाओं में संस्कार और नैतिक मूल्य समाप्त हो रहे है

भले ही बूढ़े माता-पिता की बातें युवाओं को जंजाल जैसी लगती हो परंतु इसके अनेक फायदे भी हैं। घर में बड़े लोगों के होने से हर व्यक्ति आत्मसंयम और अनुशासन में रहता है। नैतिक मूल्य बचे रहते हैं। परंतु जब घर में वृद्ध और बड़े नहीं होते तो युवा भी भटक जाते हैं।

अक्सर वो शराब, नशा जैसी बुरी लतें पाल लेते है। आजकल लिव इन रिलेशनशिप का चलन धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है। बिना शादी किए ही युवा लड़का- लड़की साथ में पति-पत्नी की तरह जीवन बिता रहे हैं जो कि देश को नैतिक पतन की ओर ले जा रहा है। इस तरह से धीरे धीरे मूल्य समाप्त हो जाएंगे।

पशुओं की तरह सिर्फ अपनी कामवासना को शांत करना शुरू कर देगा। हम सभी मनुष्य हैं। हम पशुओं की तरह कामांध होकर व्यवहार नहीं कर सकते है। हमें मनुष्य की श्रेष्ठता को बचाए रखना होगा।

4. वृद्ध लोगों को ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में भेजा जा रहा है

आये दिन हमें यह सुनने में मिलता है कि युवा बच्चे विवाह कर मौज मस्ती मे जिंदगी जीते हैं, पर बूढ़े माता पिता की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं होता है। छोटी छोटी चीजों के लिए भी बूढ़े मां बाप को विनती करनी पड़ती है।

बहुत बार तो यह सीमा को पार कर जाता है। युवा पुत्र-पुत्र वधू तो खुद का खाने पीने का बहुत ध्यान रखते हैं परंतु मां बाप भूखे ही रह जाते हैं। वृद्ध होने के कारण वे शरीर से कमजोर हो जाते हैं। ना ही उनके पास धन होता है और ना ही इतनी शक्ति की वृद्धावस्था में जीविकोपार्जन कर सके।

उन्हें पूरी तरह से अपने बच्चों पर आश्रित होना पड़ता है। बहुत से बच्चे अपने बूढ़े मां बाप को ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में भर्ती करवा देते हैं, जिससे उन्हें मां बाप की परवरिश और देखभाल से छुटकारा मिल जाये।

यह चलन अमेरिका जैसे पाश्चात्य देशों में सबसे अधिक देखने को मिलता है परंतु यह कुरीति धीरे-धीरे भारत में भी अपने पैर पसार रही है, जो कि बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। इस तरह हमारा देश निश्चित रूप से पतन की ओर जाएगा।

युवा पीढ़ी भी वृद्ध होकर जनरेशन गैप का शिकार होती है – जो युवा अपने मां बाप की इज्जत नहीं करते, आगे चलकर उनके साथ भी वैसा ही होता है। उनके बच्चे भी आगे चलकर उनको बेसहारा छोड़ देते हैं। उनके बच्चे भी बड़े होकर उनकी इज्जत नहीं करते और उनसे कन्नी काट जाते हैं।

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) को कैसे कम करें? How to Reduce Generation Gap in Hindi?

यह समस्या केवल संयम और धैर्य से दूर की जा सकती है। युवाओं को यह बात समझनी चाहिए कि माता पिता उन पर कोई रोक टोक नहीं लगाना चाहते। वह बस उनकी भलाई चाहते हैं।

वहीं प्रौढ़ और वृद्ध लोगों को यह समझना चाहिए कि युवाओं पर कोई भी इच्छा न थोपे। उन्हें वही काम करने दे जिसमें उन्हें अच्छा लगता है। जब युवा कोई गलत काम करें तो ही उन्हें टोकना चाहिए।

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पीढ़ी का अंतर या पीढ़ी अंतराल पर निबंध

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By विकास सिंह

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विषय-सूचि

पीढ़ी अंतराल निबंध, generation gap essay in hindi (100 शब्द)

दो लोग जिनका अलग अलग समय में जन्म हुआ है एक दुसरे से काफी अलग अलग होते हैं। इनमे से एक होता है उनके सोचने का तरीका। आज के समय में दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है जिसकी वजह से नयी नयी पीढियां पुरानी पीढ़ियों से काफी बदलती जा रही हैं। यदि हम भारत का उदाहरण ले तो जो लोग स्वतंत्र से पहले जन्मे थे वे स्वतंत्र के बाद जन्मे लोगों से विचारों में बिलकुल अलग हैं और जो लोग 21वीं सदी में जन्में हैं वे पिछले लोगों से बिकुल अलग हैं। यह मुख्यतः अलग अलग समय और परिस्थितियों में जन्म लेने की वजह से होता है।

जब दो पीढ़ियों में अंतर हो जाता है तो हम इसे पीढ़ी अन्तराल या जनरेशन गैप (generation gap) कहते हैं। बदलते समय के साथ लोगों के जीने के तौर तरीके, विचारधारा, विशवास और सम्पूर्ण व्यवहार में ही बदलाव आता है जिससे वे दुसरे लोगों से बिलकुल भीं होते हैं। माँ-बाप और बच्चों के बेच ये अंतर आने की वजह से इस रिश्ते में तनाव आता है और अक्सर झगडे होते हैं। हालांकि इसे उचित प्रबंधन से दूर किया जा सकता है।

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पीढ़ी का अंतर निबंध, generation gap essay in hindi 2 (200 शब्द)

पीढ़ी में अंतर तब होता है जब दो लोगों के बीच उम्र का काफी फर्क होता है जिससे उन दोनों के विचार मेल नहीं खाते हैं। जैसे माँ-बाप और बच्चे, इनकी विभिन्न राय होती है और इसी कारण से उनमे अक्सर टकराव होता है। पीढ़ी के अंतर या जनरेशन गैप को किन्हीं दो विभिन्न पीढ़ियों के लोगों की विचारधाराओं के अंतर के रूप मे समझाया जाता है। आज के समय में जब पूरी दुनिया के हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहे हैं और इसी वजह से अलग अलग समय में जन्में लोगो के विचार भी अलग अलग होते हैं।

हम उदाहरण के तोर पर भारत को ही लेते हैं यहाँ 21वीं सदी में पैदा हुए लोग पिछली सदी में पैदा हुए लोगों से विचारधाराओं के मामले में बिलकुल अलग हैं। विभिन्न लोगों के विचार मेल नहीं खाते है हालांकि दोनों व्यक्ति अपने हिसाब से सही होते हैं लेकिन समय परिवर्तन के हिसाब से पहले जन्में लोग अपने आप को व्यवस्थित नहीं कर पाते और इसी वजह से हाल ही में जन्में लोग और उनके विचार मेल नहीं खाते हैं और टकराव होता है।

जनरेशन गैप के अंतर का मुख्य असर माता-पिता और संतान के रिश्ते पर पड़ता है। आजकल लोग ज्यादा स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं और साथ ही ज्यादा निजता बनाए रखना पसंद करते है हालांकि माँ-बाप की सोच थोड़ी अलग है। माँ-बाप अपने बच्चों में नैतिकता और व्यवाहरिकता सिखाना चाहते है, जिससे इस रिश्ते में अक्सर टकराव देखा जाता है। हालांकि जनरेशन गैप को जड़ से ख़त्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन यदि माँ-बाप और बच्चे यदि आपस में अपने सभी विचार रखें और सही गलत का फैसला मिल कर करें तो अन्तर से होने वाले टकराव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

पीढ़ी अंतराल निबन्ध, generation gap essay in hindi 3 (300 शब्द)

दो पीढ़ी के व्यक्तियों के विचार और तौर तरीकों में जब समय के साथ अंतर आ जाता है तो इसे जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल कहा जाता है। अक्सर देखा जाता है की माँ-बाप और दादा-दादी के विचार काफी अलग होते हैं इसके अलावा माँ-बाप और बच्चों के विचारों में भी अक्सर अंतर देखा जाता है ऐसे ही आने अंतर की वजह से पीढ़ी अंतराल होता है जिससे की दो पक्षों के विचार बदलते हैं।

पीढ़ी अंतराल की उत्पत्ति (Origin of the Term)

जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल शब्द की उत्पत्ति सबसे पहले 1960 में हुई थी। यह ऐसा समय था जब पहली बार देखा गया की एक बच्चा अपने माँ-बाप के हर नियम के खिलाफ जाने लगा या उन पर सवाल उठाने लगा। इसमें उनके धार्मिक विश्वास, राजनीतिक विचार, नैतिक मूल्य, रिश्ते की सलाह और यहां तक कि संगीत के प्रकार भी शामिल थे। कुछ समाजवादी व्यक्तियों ने सी विषय पर रिसर्च की और पीढ़ियों के बीच बढ़ रहे अंतर और तेजी से बदला रहे विचारों को जांचा।

जनरेशन गैप की अवधारणा (Interesting Concept)

हालांकि जनरेशन गैप माँ-बाप और बच्चों के बीच टकराव का एक मुख्य कारण होता है, लेकिन जनरेशन गैप इस दुनिया में होना ज़रूरी भी है। इसी की वजह से हर नई पीढ़ी कुछ नया करती है और यदि जनरेशन गैप नहीं होता तो इस दुनिया में बदलाव की गति बहुत धीमी होती। आज कल की बदलती दुनिया में हर नयी पीढ़ी नया फैशन, नए आविष्कार कर रही है क्योंकि उनके विचार, तरीके और ज़रूरतें बदल रही है और इसी वजह से हमारी दुनिया में तकनीकें इतनी तेजी से विकसित हो रही हैं।

जनरेशन गैप की वजह से इसी दुनिया में काफी बदलाव आये हैं जैसे भारत में पहले बड़े परिवार होते थे जिसमे एक से अधिक परिवार मिलकर रहते थे लेकिन अब लोगों की धारणाएं बदल गयी है और अब वे निजता चाहने लगे हैं जिसके कारण ज़्यादातर लोग छोटे परिवारों में रहते है और यहाँ तक की वे अपने माँ-बाप के साथ भी रहना पसंद नहीं करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

जैसा की हर चीज़ का फायदा भी होता है और नुक्सान भी उसी तरह जनरेशन गैप के भी अपने फायदे और नुक्सान हैं। यदि यह नहीं रहेगा तो हमारी दुनिया इस तेजी से नहीं बढ़ेगी हालांकि इसे होने वाले नुक्सान को कुछ प्रयत्न करके हम काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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जनरेशन गैप essay on generation gap in hindi, (400 शब्द)

प्रस्तावना (introduction).

आज के परिदृश्य में दुनिया काफी तेजी से बदल रही है। विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में भी उनाती हो रही है और इसी के साथ साथ लोगों का रहन सहन और उनके विचार और जीने के तरीके और ज़रूरतें बदल रही है। इसी के परिणामस्वरूप एक विशेष पीढ़ी के लोगों की धारणाएं दूसरी पीढ़ी के लोगों से मेल नहीं खाती यानी अलग होती हैं और इसे ही जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल कहा जाता है।

पीढ़ी अंतराल कैसे प्रत्यक्ष होता है? (How is the Generation Gap Evident?)

अलग अलग पीढ़ियों संबंधित लोगों को अलग अलग नाम दिए जाते हैं जैसे जो लोग स्वतंत्रता से पहले हुए थे उन्हें परम्परावादी कहा जाता है इसके अलावा जो लोग 1950-1965 के बीच पैदा हुए हैं उन्हें बेबी बूमर्स कहा जाता है। इसके साथ जो लोग 1965-1980 के बीच पैदा हुए हैं उन लोगों को जनरेशन एक्स और इसके बाद पैसा हुए लोगों को जनरेशन वाय कहा जाता है। निम्न बिंदु पीढ़ी अंतराल को दर्शाते हैं :

1. सयुंक्त परिवार और छोटा परिवार :

पहले की पीढ़ी के लोग अक्सर सयुंक्त परिवार के रूप में रहा करते थे यानी एक से अधिक परिवार एक ही घर में एक साथ रहा करते थे लेकिन बदलते समय के साथ युवाओं की सिच बदल रही है और वे सभी निजता को तरजीह देने लगे हैं जिससे छोटे परिवार उभर रहे है। सभी निजता बनाए रखना चाहते हैं जिसके कारण एक सयुंक्त परिवार से दूर ही रहना पसंद करते हैं और यहाँ तक वे अपने माँ-बाप को भी अपने साथ रखना ठीक नहीं समझते है।

2. भाषा :

जनरेशन गैप की वजह से प्रयोग में ली जा रही भाषा में भी बदलाव देखने को मिले हैं। जैसे जो हिंदी लोग स्वतंत्रता से पहले बोलते थे वैसी हिंदी अब नहीं बोलते हैं उसमे काफी बदलाव आ चुके हैं इसके साथ ही भाषा में कई नए शब्द भी जुड़े हैं ऐसे में यदि कोई पिछली पीढ़ी का व्यक्ति आज के युवाओं से वाद विवाद करता है तो कुछ शब्द उसकी समझ से बाधार होते हैं जिससे वार्ता बाधित होती है।

3. हावभाव :

पिछली पीढ़ियों के लोग अपने अधिकारियों के प्रति वफादार थे और उनसे दिशा निर्देश लेकर काम करने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती थी लेकिन आज की यूवा पीढ़ी इससे बिलकुल अलग है। आज सभी अपना व्यवसाय खोलना चाहते हैं और कोई भी किसी दुसरे के नीचे कार्य नहीं करना चाहता है। इस कारण पिछली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी में बहुत बदलाव देखने को मिला है और इसी कारण से बहुत से नए इंटरप्रेन्योर बने हैं।

4. महिलाओं के प्रति व्यवहार :

पहले महिलाएं मुख्यतः घर के अन्दर रहा करती थी और उन पर घर के कामकाज का पूरा बोझ हुआ करता था। इसके साथ में पुरुष को ही बाहर जाकर कार्य करने की अनुमति हुआ करती थी और महिलाएं घर का कार्य संभालती थी। लेकिन अब समाज का महिलाओं के प्रति रवैय्या बदल गया है और अब वे अपनी इच्छानुसार कोई भी कार्य कर सकती हैं या किसी भी क्षेत्र में जा सकती है। नए ज़माने में उन्हें घर की बेड़ियों से आज़ादी मिली है।

यदि दो पीढ़ी के लोग एक दुसरे से मेल नहीं खाते हैं तो यह एक आम बात है लेकिन यदि एक पीढ़ी के लोग दूसरी पीढ़ी के लोगों पर अपने विचार थोपते हैं तो यह जनरेशन गैप से नुक्सान होता है। हमें ऐसा करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दो पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ता है और अक्सर टकराव होते है।

जनरेशन गैप, essay on generation gap in hindi (500 वर्ड्स)

जनरेशन गैप मुख्यतः दो पीढ़ियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर की वजह से उनके विचारों मरीं भिन्नता आती है। इसको सबसे पहले 1960 में पहचान दी गयी थी तब माना जा रहा था की वर्तमान पीढ़ी अपने से पहले की पीढ़ी के हर विचार और विश्वास आदि पर सवाल उठा रही है। पीढ़ी अंतराल का यह मुख्या असार होता है की एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी के विचारों से बिलकुल सहमत नहीं होती या फिर उन पर सवाल उठाती है।

विभिन्न पीढियां (Classification of Generations)

जब गेन्रतोइन गैप की पहचान की गयी तभी से ही विभिन्न पीढ़ियों का वर्गीकरण किया जाने लगा। इसके मुताबिक़ जो लोग स्वतंत्रता से पहले जन्मे थे उन्हें पारंपरिक कहा जाने लगा इसके बाद जन्मे लोगों को बेबी बूमर्स और 1965-1980 के बीच जन्मे लोगों को जनरेशन एक्स और इसके बाद जन्म लेने वाले लोगों को जनरेशन वाई नाम दिया गया।

  • पारंपरिक लोग :

यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग में लिया जाने लगा जोकि स्वतंत्र से पहले यानी 1946 तक जन्म ले चुके थे। इन लोगों को परम्परावादी या पारंपरिक कहा जाता है। ये अभी तक 70 वर्ष या अधिक के हो चुके हैं और ये सामान्य ज़िन्दगी जीना पसंद करते हैं। ये अपने से ऊपर के लोगों से दिशा-निर्देश लेने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते हैं और अपने से छोटे लोगों के साथ प्रेम से रहते हैं तथा अपनी ज़िन्दगी के घटनाओं के बारे में बताना पसंद करते हैं। ये लोग आने वाली पीढ़ी के लोगों से काफी अलग हैं।

2. बेबी बूमर्स :

यह शब्द ऐसे लोगों के प्रयोग किया जाता है जोकि स्वतंत्र के बाद जन्मे लेकिन 1965 से पहले जन्म ले चुके थे। इस पीढ़ी के लोग कड़ी मेहनत करने वाले हैं लेकिन ज्यादातर लोग फीडबैक पर निर्भर नहीं होते हैं। उन्हें अपने काम पूरा करने के पुरस्कार के रूप में पैसा और प्रचार भी चाहिए। चूंकि इनमें से अधिकतर ऐशो-आराम से नहीं जिए इसलिए वे सुनिश्चित करते हैं कि उनके बच्चों को वह सब कुछ मिले जो वे चाहते हैं। अतः वे पाने बच्चों का पूरी तरह ख्याल रखते और चाहते हैं की उनकी सराहना की जाए। वे चाहते हैं कि उनके अधिकारी और बच्चें यह समझे कि वे मूल्यवान और आवश्यक हैं। इन सभी चीजों की कमी उनके बीच असंतोष पैदा करती है।

3. जनरेशन एक्स :

जनरेशन एक्स शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जोकि वर्ष 1965 से 1980 के बीच जन्मे थे। जनरेशन एक्स अपने काम से अपनी पहचान बनाता है। यह समय समय पर छुट्टी लेना पसंद करते हैं और ये लोग नियमों से काम करना पसंद नहीं करते हैं। वे चीज़ों को अपने तरीके से करना बेहद पसंद करते हैं। इन लोगों ने अपने माता-पिटा को काम करते देखा था जिससे इनपर बुरा असर हुआ और अब ये अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत पसंद करते हैं।

4. जनरेशन वाई :

यह शब्द ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है जोकि वर्ष 1981 से 1999 के बीच जन्मे थे। इनमे से अधिकांश ने अभी काम करने की उम्र में प्रवेश किया है। यह समूह सार्थक काम में शामिल होने में दिलचस्पी लेता है और अपने काम के प्रति अपनी फीडबैक देने में भी आगे रहता है।

इस पीढ़ी के लोग काफी रचनात्मक होते हैं। वे रचनात्मक व्यक्तियों और उन स्थानों पर काम करना पसंद करते हैं जहां उनकी रचनात्मकता का पता लगाने की अनुमति होती है। यह उनके लिए प्रेरणा का एक स्रोत है और उन्हें जिंदा रखता है। यह एक ऐसी पीढ़ी है जो बहुत जल्दी ऊब जाती है। परंपरावादियों के विपरीत वे अपनी नौकरी काफी बार बदलते हैं। ये एक वर्ष में कई बार अपनी नौकरियां बदलते हैं। ये वहां नौकरी करते हैं जहां उनकी प्रतिभा के अनुसार उन्हें काम में लिया जाता है।

यह दुनिया काफी तेजी से बदला रही है और इसी के साथ इंसान अपने आप को भी बदल रहा है इसके हमें बदलती दुनिया के साथ बदलते रहना चाहिए। यदि हमारे विचार दुसरे व्यक्ति से मेल नहीं खाते तो यह गलत नहीं है लेकिन यदि इस बात पर झगडा होता है तो इससे हमें बचने की कोशिश करनी चाहिए।

पीढ़ी अंतराल, essay on generation gap in hindi (600 शब्द)

पीढ़ी अंतराल या जनरेशन गैप एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। विभिन्न प्रयोगों के निष्कर्ष से पता चला है की इस तेजी से बदलती दुनिया में दो पीढ़ियों में बदलाव आना एक साधारण बात है। बल्कि यह इंसानों के लिए बहुत अच्छी बात है क्योंकि इसी के आधार पर हम बेहतर होते हैं और बदलती दुनिया के साथ अपने आप को भी बदल पाते हैं। यदि पीढ़ी में कोई अंतर नहीं होगा तो हम उन्नति नहीं करेंगे और हमारे जीवन जीने का कोई उद्देश्य नहीं बच जाएगा।

रिश्तों पर पीढ़ी अंतराल का असर (Impact on Relations)

दो पीढ़ियों के विचार भिन्न होना एक आम बात है यह सामान्य है क्योंकि सभी समान विचार वाले नहीं होते लेकिन जब इस विचार में अंतर की वजह से रिश्तों में अनबन होती है तो यह जनरेशन गैप के नुक्सान बताता है। जैसा की अक्सर देखा जाता है की माँ-बाप और बच्चों के बीच विचार भेद जनरेशन गैप की वजह से होता है। इससे माँ-बाप जो बच्चे को सिखाते है उस पर वह सवाल उठाता है और वह जो करता है उस पर उसके माँ-बाप सवाल उठाते हैं। इन कारणों से जनरेशन गैप के दुप्रभाव अधिक माने जाते हैं।

माता-पिता को अपने बच्चे से बहुत उम्मीदें होती है। वे चाहते हैं की उनका बच्चा उनके हिसाब से कार्य करे लेकिन जब बच्चे के विचार अलग होते हैं तो इससे अक्सर उनके बीच झगडे होते हैं। बच्चे हर एक चीज़ का कारण जानना चाहते हैं लेकिन माँ-बाप केवल ये चीज़ें बच्चों पर पर थोप देते हैं और उनकी जिज्ञासा अधूरी रह जाती है। जब उन्हें किसी चीज़ का कारण नहीं पता होता तो वे उसे कारन भी पसंद नहीं करते। माँ-बाप को लगता है की वे हर जगह सही हैं लेकिन उन्हें हर फैसले से पहले दोनों पक्षों की राय लेनी चाहिए और अपने बच्चों से अच्छी तरह बातें करनी चाहिए।

जनरेशन गैप कैसे ख़त्म हो सकता है? (How to Bridge the Gap?)

माता-पिता और बच्चों के बीच एक बहुत सुन्दर होता है। इसमें माता-पिता का कर्त्तव्य होता है की वे बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करें और प्यार से रखें। ऐसे में कभी बच्चे के विभिन्न विचार होते हैं तो ऐसे में माँ-बाप को इसे निपुणता से संभालना चाहिए और बच्चे की हर जिज्ञासा शांत करना चाहिए।

यह समझने की ज़रुरत है की दो पीढ़ियों में से किसी कार्य को लेकर कोई भी पीढ़ी गलत नहीं होती है। वे दोनों अपनी जगह सही होती हैं ऐसे में झगडे की बजाय अपने अपने निर्णय को फिर से एक बार फिर से मंथन करने की ज़रुरत होती है और हम इस गैप को मिटा सकते हैं।

जो लोग पिछली पीड़ी के हैं उन्हें समझना चाहिए की जो नयी पीढ़ी है उनके बेशक विचार अलग होंगे क्योंकि वे अलग समय में जन्मे हैं और इसी के कारण उनके विचार का मेल ना खाना स्वाभाविक है। माँ-बाप को इस बात पर ध्यान देने की ज़रुरत है की उनका बच्चा इस प्रकार का व्यवहार क्यों कर रहा है। उन्हें अपने बच्चे को सारी बातें बतानी चाहिए और प्रोत्साहित करना चाहिए की वह भी अपने विचार उनके समक्ष रखे।

इसके अलावा माँ-बाप को अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बानने देना चाहिए क्योंकि वे अगर हर काम में बीच में आयेंगे तो वह खुद से फैसला लेना नहीं सीखेगा। इसके साथ ही उन्हें अपने बच्चे के साथ नियमित रूप से बातें करनी चाहिए। इन कुछ तरीकों से वे जनरेशन गैप से होने वाले नुक्सान से बाख सकते हैं और उनका रिश्ता बना रह सकता है।

इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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बहुत ही उत्तम शैली मेँ आपने निबन्ध लेख लिखा है।

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पीढ़ी अंतराल पर निबंध- Essay on Generation Gap in Hindi

In this article, we are providing information about Generation Gap in Hindi- Short Essay on Generation Gap in Hindi Language. ( जनरेशन गैप ) पीढ़ी अंतराल पर निबंध

पीढ़ी अंतराल का अर्थ है दो पीढ़ीयों के बीच का अंतर। अलग अलग समय पर जन्में लोगों की विचारधारा में बहुत बड़ा अंतर है जो कभी कभी दो पीढियों में मतभेद और संघर्ष का कारण बन जाता है। समय के साथ लोगों के विचार बदलते रहते है और उनमें मतभेद बढ़ते रहते हैं। जिन लोगों का जन्म हमसे दस साल पहले हुए था उनका रहन सहन हमसे बहुत भिन्न होता है। दो पीढ़िया एक दुसरे से सामाजिक और नैतिक माहौल में अलग होती है।

पीढ़ियो के बीच में बहुत से अंतर होते है सबसे पहला रूढ़िवादी सोच का। जो लोग पुराने समय के होते है वह पुराने ख्यालों को होते हैं और परंपरावादी होते है और समाज से बंधे होते है जबकि नई पीढ़ी खुले विचारों की होती है वह समाज की परवाह किए बिना अपनी जिंदगी खुलकर जीना चाहती है। पहनावे और खान पान में भी बहुत फर्क होता है एक को बाहर का कम पसंद होता है तो दुसरी पीढ़ी सिर्फ बाहर का ही खाती है और दोनों अलग अलग तरह के कपड़े पहनती है। नई पीढ़ी तकनीक और विग्यान का प्रयोग करती है जबकि पुरानी पीढ़ी अपने दिमाग का प्रयोग करती है।

हर दो पीढ़ी में फर्क होता है चाहे वो हम और हमारे माता पिता हो या फिर हमारे माता पिता और दादा दादी हो। दो पीढियों की भाषा में भी अंतर होता है और साथ ही हर पीढ़ी के साथ महिलाओं को पहले से ज्यादा स्वतंत्रता मिली है। पीढ़ी दर पीढ़ी पारिवारिक प्रणाली में भी बहुत अंतर आया है। पहले लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते थे पर अब उनका मानना है कि छोटा परिवार ही सुखी परिवार होता है।

पीढ़ी अंतराल के कारण ही अक्सर सबके अपने माता पिता से वाद विवाद होते रहते हैं और यह पीढ़ियों का अंतर हमारे रिश्तों पर प्रभाव डालता है। हमारे माता पिता अपने समय की सोच रखते हैं और समय के साथ अपनी सोच नहीं बदलना चाहते हैं और साथ ही हम भी उनकी बातों को समझ नहीं पाते कि वो हमारे भले के लिए ही कह रहे है। रिश्तों को प्यार से निभाने के लिए हमें पीढ़ी के इस अंतर को खत्म करना होगा और सोच समझ का एक सामंज्सय बिठाना होगा। लोगों को समय के साथ खुद को बदलना होगा जिससे कि वो बच्चों की बातों को आसानी से समझ सके और बच्चों को भी बड़ी पीढ़ी को अपनी बात समझानी चाहिए और उनकी बात भी समझनी चाहिए क्योंकि समय के साथ संस्कार नहीं बदलते हैं। हम सबको मिलकर इस पीढ़ी अंतराल को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।

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Generation Gap Essay in Hindi, Anuched, जनरेशन गैप पर निबंध

जनरेशन गैप पर कई रिपोर्टें हैं। हर कोई इन मुद्दों के बारे में बात करता है और जनरेशन गैप हाल के वर्षों में चर्चा के मुख्य विषयों में से एक बन गया हैं। हालांकि, इसके बारे में अभी भी बहुत कुछ कहा जाना बाकी है। जनरेशन गैप पर इस निबंध में, मैं अपने दृष्टिकोण से इन मुद्दों पर कुछ प्रकाश डालने की कोशिश करूंगा.

जीवन की गति को बदलने से जनरेशन गैप समाज में एक महत्वपूर्ण समस्या बन गया है। इसने कई गलतफहमियों और गलत फैसलों को जन्म दिया है।

जनरेशन गैप क्या है?

जनरेशन गैप विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच का अंतर है। जनरेशन गैप का अंतर सोच, विचार, व्यवहार और संवेदनाओं में अंतर है। इस अंतर से अवगत कोई व्यक्ति हमेशा दो पीढ़ियों के बीच सामंजस्य लाने का तरीका खोजने की कोशिश करता है।

100 शब्दों में जनरेशन गैप पर निबंध

जनरेशन गैप एक ऐसा शब्द है जो समय के साथ लोकप्रियता हासिल करता है। यहां 100 शब्दों में जेनरेशन गैप पर एक निबंध दिया गया है।

जनरेशन गैप किसी भी समाज के विकास का एक सामान्य हिस्सा है। यह पीढ़ियों के परिवर्तन के कारण होता है, जो अलग तरह से और जीवन पर अलग-अलग दृष्टिकोणों के साथ उठाए जा रहे हैं, कई चीजों के लिए वृद्ध और नौजवान एक अलग दृष्टिकोण रखते व प्रदान करते हैं।

जबकि एक अलग दृष्टिकोण रखने की बजाय आपको कमियों को भरने की कोशिश करनी चाहिए और उन कुछ चीजों के बारे में सीखना चाहिए जिनमें युवा रुचि रखते हैं, एक हारी हुई लड़ाई से बचने और पीढ़ी के अंतर को जीवन के एक सामान्य और स्वस्थ हिस्से के रूप में स्वीकार करने में ही समझदारी है।

जेनरेशन गैप दो पीढ़ियों के बीच मूल्यों, विश्वासों और जीवन शैली में अंतर है। यह अक्सर गलतफहमी का स्रोत होता है। युवा बूढ़े पर अज्ञानी होने का आरोप लगाते हैं, जबकि बूढ़े सोचते हैं कि उनके पोते अलग हैं और अपने बड़ों के लिए उनके मन में कोई सम्मान नहीं है।

150 शब्दों में जनरेशन गैप पर निबंध

जनरेशन गैप को विभिन्न पीढ़ियों के लोगों के बीच अंतर के रूप में परिभाषित किया गया है। इसे दो पीढ़ियों के बीच व्यक्तित्व और दृष्टिकोण के अंतर के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। शब्द "पीढ़ी का अंतर" 1960 के दशक के दौरान किशोरों (बेबी बूमर पीढ़ी के) और उनके माता-पिता के बीच अंतर को संदर्भित करने के लिए अस्तित्व में आया, जो द्वितीय विश्व युद्ध की पीढ़ी का हिस्सा थे और जीवन के प्रति एक अलग दृष्टिकोण द्वारा लाए गए थे। .

जनरेशन गैप उन मतभेदों को संदर्भित करता है जो विभिन्न पीढ़ियों के लोगों के बीच उनकी मान्यताओं और विश्व विचारों के बारे में मौजूद हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जो आज तक हर देश को प्रभावित करता है। युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण की तुलना में वृद्ध लोगों का दृष्टिकोण हमेशा दिलचस्प होता है क्योंकि प्रत्येक बीतते दिन के साथ, उनके आचरण करने के तरीके में भारी अंतर होता है।

जेनरेशन गैप एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल आजकल आम तौर पर किया जाता है। न केवल युवाओं और बड़ों के बीच के अंतर का वर्णन करने के लिए, बल्कि कई अन्य प्रकार के अंतरालों का भी वर्णन करने के लिए।

200 शब्दों में जनरेशन गैप पर निबंध

पारिवारिक जीवन में सबसे अधिक चर्चा वाले विषयों में से एक किशोरों और उनके माता-पिता या दादा-दादी के बीच पीढ़ी का अंतर है। यह निबंध इस विषय पर चर्चा करता है और बताता है कि दोनों पीढ़ियां इससे कैसे प्रभावित होती हैं।

जेनरेशन गैप पीढ़ियों के बीच का अंतर है जो मूल्यों, विचारों और जीवन शैली में अंतर की विशेषता है।

जनरेशन गैप माता-पिता और बच्चों के बीच या दो पीढ़ियों के बीच उम्र का अंतर है। कार्यस्थल में पीढ़ीगत मतभेद संचार समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

'जनरेशन गैप' समाज में विभिन्न समूहों के लोगों के बीच एक ही मुद्दे या समस्या पर विभिन्न दृष्टिकोणों को संदर्भित करता है। यह एक समाज के भीतर लोगों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक अंतर को संदर्भित करता है जो दो अलग-अलग आयु समूहों से संबंधित हैं।

यह शब्द विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक अंतरों पर लागू होता है। बड़े अंतराल हैं, जैसे कि युवाओं और बुजुर्गों के बीच, और एक पीढ़ी के भीतर विभिन्न समूहों के बीच छोटे अंतराल।

जेनरेशन गैप एक ऐसी चीज है जो इंसान के तौर पर हमेशा हमारे साथ रहेगी। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि हमारे माता-पिता, दादा-दादी और यहां तक ​​कि दूर के रिश्तेदार भी मोबाइल फोन, कंप्यूटर और लैपटॉप आदि जैसे तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके बड़े नहीं हुए।

इन समय बचाने वाले उपकरणों का उपयोग करने के कई फायदे हैं जबकि शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से समुदाय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से पूरी तरह अवगत नहीं होने का नुकसान भी है।

जनरेशन गैप युवा या वृद्ध व्यक्तियों के व्यवहार, भाषा, विचार और राजनीतिक विचारों में समायोजन को संदर्भित करता है, जबकि वे जीवन चक्र के विभिन्न चरणों में होते हैं। पीढ़ियों के बीच काफी अंतर होता है, जो प्रत्येक अपने जीवन काल में कुछ चरणों के दौरान एक साथ समूहीकृत होते हैं। उम्र की पीढ़ियों और पुराने लोगों के आने से उस अवधि के आधार पर अलग-अलग बदलाव आएंगे जब उन्होंने अपने जीवन में बदलाव का अनुभव किया।

300 शब्दों में जनरेशन गैप निबंध

जनरेशन गैप विभिन्न पीढ़ियों के लोगों के विभिन्न समूहों के बीच मूल्यों और विश्वासों में अंतर है। यहाँ पीढ़ी अंतराल पर 300 शब्दों में एक वर्णनात्मक निबंध है।

आज हम समाज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना कर रहे हैं। मूल्यों, विश्वासों और आर्थिक स्थिति के संबंध में पीढ़ियों के बीच भारी अंतर सामाजिक एकता, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए एक आसन्न खतरा बन गया है।

हम पुरानी पीढ़ी के बीच की खाई को पाटने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, जो हमारे कानूनों को डिजाइन करते हैं, निर्णय लेते हैं और व्यवसायों का प्रबंधन करते हैं, और युवा पीढ़ी, जो अधिक सहिष्णु, खुले दिमाग और टिकाऊ दुनिया चाहते हैं।

जनरेशन गैप को समझने के लिए अब से बेहतर समय कभी नहीं था। जनरेशन गैप को एक अंतर-पीढ़ीगत संघर्ष के रूप में वर्णित किया जाता है जो माता-पिता और बच्चों को राय, रुचियों, सांस्कृतिक विश्वासों, धार्मिक संबद्धता और इतिहास में अंतर के कारण अलग करता है। इस तरह के संघर्ष पश्चिमी समाजों सहित सभी समाजों में समय-समय पर होते रहे हैं।

हम सभी ने "जेनरेशन गैप" के बारे में सुना है। इसके अर्थ की कई तरह से कल्पना की गई है और यह हमारी रोजमर्रा की भाषा का हिस्सा बन गया है। लेकिन इससे पहले कि हम इसे परिभाषित करें, आइए देखें कि इसे विभिन्न तरीकों से कैसे समझा जाता है।

सामाजिक अंतःक्रिया, सामाजिक संघर्ष और मनोवैज्ञानिक विकास के संदर्भ में, पीढ़ी का अंतर व्यवहार में प्रत्यक्ष प्रासंगिकता की समस्या के लिए एक सामान्य व्यक्ति का दृष्टिकोण प्रदान करता है। इस अर्थ में, यह एक नई समझ है जो पहले की स्थितियों से प्राप्त हुई है। इसमें मूल्यों, प्रतिबद्धताओं, विश्वासों और बुनियादी मान्यताओं में बदलाव शामिल है।

वर्तमान समय में बच्चों के बड़े होने पर बहुत सारी समस्याएं सामने आ रही हैं। इस तरह की समस्या के लिए कई कारक हैं, जिससे यह एक वैश्विक मुद्दा प्रतीत होता है। इसका मुख्य कारण पीढ़ी के बीच का समय अंतराल है जिसका अर्थ है अलग-अलग उम्र के लोगों के अलग-अलग विचार और विचार।

हम तकनीकी क्रांति के युग में रहते हैं जहां विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति हो रही है। हालाँकि, इन प्रगतियों के साथ एक पीढ़ी का अंतर भी आया है जहाँ प्रत्येक आयु वर्ग दूसरों पर श्रेष्ठता के लिए प्रतिस्पर्धा करता है। यह एक बढ़ती हुई घटना है जहां युवा पीढ़ी पुरानी पीढ़ियों की जीवन शैली से ईर्ष्या करती है और उनके द्वारा उपहास या अपमान महसूस कर सकती है।

निष्कर्ष

जनरेशन गैप पर इस निबंध में हम कार्यस्थल में वर्तमान में चार पीढ़ियों का सर्वेक्षण करते हैं ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां अंतराल सबसे अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इसके बाद, हम प्रत्येक पीढ़ी के लिए उन विशेषताओं का वर्णन करते हैं जो उनके बीच सेतु का काम कर सकती हैं। अंत में, हम उन चरों को इंगित करते हैं जो भविष्य में किसी विशेष पीढ़ी के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

जेनरेशन गैप दो पीढ़ियां हैं जो एक-दूसरे के समान नहीं हैं; पुरानी और युवा पीढ़ी। यह निबंध पुरानी और युवा पीढ़ी के बीच पीढ़ी के अंतर पर केंद्रित है, जो आमतौर पर पीढ़ी के संघर्ष, पीढ़ी की पहचान और सांस्कृतिक अंतर से संबंधित है।

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पीढ़ी अंतराल पर निबंध-Generation Gap hindi essay

पीढ़ी अंतराल हर युग में देखा जा सकता है। जब बच्चे बड़े हो जाते है तो युवा अवस्था में अपने फैसले खुद करते है। युवा वर्ग के सोच और उनके माता पिता के सोच में अंतर पैदा हो जाता है। इसी को जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल कहते है। कई बार देखा गया है युवा पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के सोच में फर्क आ जाता है।  हर युग में अलग अलग सोच होना लाज़मी है। इसी वजह से कई जगहों और हालातों  में विवाद उतपन्न होता है।

एक वक़्त हर पीढ़ी में ऐसा आता है जहां विचारो में भिन्नता पायी जाती है। बहुत बार युवाओ को ऐसा लगता है कि उनके माता पिता की सोच पुरानी है। उन्हें लगता है वह  उनके विचारो को समझ नहीं रहे है।  इसी वजह से मतभेद देखा जा सकता है।उदाहरणस्वरूप जैसे बच्चे नए , पॉप गाना  सुनना पसंद करते है। वहीं उनके माता पिता पुराने गाने और भजन सुनना पसंद करते है।  पुराने पीढ़ी के लोग जब एक दूसरे से मिलते थे तो नमस्ते करते थे , आज के ज़माने में नयी पीढ़ी के लोग हाई , हेलो करते है। पहले के ज़माने में मोबाइल फ़ोन नहीं था तो लोग अपनों को समय दे पाते थे।  आजकल के लोगो को जैसे ही खाली समय मिलता है , वह  मोबाइल पर सक्रीय हो जाते है।  असली जिन्दगी में नयी पीढ़ी  लोगो के साथ इतना मेल मिलाप नहीं करते  है , जितना की वह ऑनलाइन करते  है। पीढ़ी अंतराल होना जैसे आम बात हो गयी है।

आजकल के युवाओ को भक्ति गीत इत्यादि में ज़्यादा रूचि नहीं है।  जब माता पिता उन्हें धार्मिक महत्व समझाते है तो वह उन्हें अहमियत नहीं देते है। वे अपने खाली समय में अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती करना पसंद करते है।ऐसा नहीं कि सभी ऐसे होते है।  कुछ ऐसे लड़के लडकियां भी होते है जो खुद के फैसले करते है और साथ ही अपने माता पिता , बड़ो के फैसले का भी सम्मान करते है।

आजकल के नौजवान और नवयुवती पैसे अधिक खर्चा करते है।  जब बड़े उन्हें पैसे बचाने का सुझाव देते है तो उन्हें यह अच्छा नहीं लगता है।आजकल  जनरेशन गैप की वजह से संयुक्त परिवार बंट रहे है।  आजकल परिवार छोटे होते जा रहे है। नयी पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के सदस्यों के सोच में काफी अंतर पाया जाता है। इसलिए परिवार में मतभेद होते रहते है। तब लोग अलग अलग परिवारों में रहते है। बड़े बच्चो का अच्छा चाहते है।  अगर परिवार के सदस्य एक दूसरे के सोच को सम्मान देंगे तो एक साथ रहना मुश्किल नहीं होगा।

पहले बड़े और संयुक्त परिवारों में सब एक साथ मिल जुलकर रहते थे।  सभी के सोच जब एक दूसरे से नहीं मिले तो लोगो ने  एकल परिवारों में रहना आरम्भ कर दिया।  पुराने पीढ़ी के लोग अपनी मातृभाषा और हिंदी का इस्तेमाल करते है।  वहीं नए जमाने के लोग अंग्रेजी में ज़्यादा बातचीत करते है और पुराने पीढ़ी के लोगो को अंग्रेजी भाषा समझने में दिक्कत होती है। आजकल के नए पीढ़ी के लड़के -लड़कियां नए फैशन के कपड़े और जूते इत्यादि पहनते है।  पुराने पीढ़ी के लोग सादगी भरा जीवन जीते है और साधारण कपड़े पहनना पसंद करते है । बोली से लेकर भाषा तक में अंतर पाया जाता है।

युवा पीढ़ी अपनी मन मर्ज़ी से जीना चाहते है। कई बार बड़ो के दिए मशवरे को वह अपने ज़िन्दगी में हश्तक्षेप मानते है।  वह बड़ो को गलत समझते है और आज़ादी से जीवन जीना चाहते है। बड़ो की अच्छी बातें उन्हें बंदिश लगने लगती है।  कई बार बड़े भी अपने बच्चो को समझ नहीं पाते है। इसी वजह से दोनों पीढ़ी के बीच अंतर पैदा होता है। इसी वजह से संयुक्त परिवार बिखर जाते है।

पीढ़ी अंतराल को कम करने के लिए दोनों पीढ़ियों को एक दूसरे को समझने की ज़रूरत है। अपनी मनमानी करने से मन मुटाव पैदा होता है। पुराने तरीके का सम्मान नए पीढ़ी को करना चाहिए।  पुरानी पीढ़ी के बताये गए  सही चीज़ो और सलाह  को गौर करना चाहिए।  अगर बच्चे कुछ गलत कर रहे है तो उन्हें समझाने के साथ , उन्हें समझाने की ज़रूरत है।

पुराने समय में महिलाएं घर के कामो में ज़्यादा संलग्न  थी। वह एक गृहिणी बनकर सभी कर्तव्यों को निभाती थी।  आज नए जमाने में लड़कियां शिक्षित हो रही है और पुरुषो के कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है। पहले लड़कियों का अधिक शिक्षित होना परिवार वाले नहीं पसंद करते थे। आज लड़कियां हर क्षेत्र में अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है।

नयी पीढ़ी के लोग अपने जीवन में रोक टोक नहीं चाहते है। वह यह समझते नहीं है कि बड़े उनका भला चाहते है और उनकी परवाह करते है। आज की पीढ़ी अपने आपको बेहतर समझती है।  वह अपने पीढ़ी द्वारा प्राप्त संस्कार और मूल्यों को भूल जाते है। नए पीढ़ी में धैर्य कम दिखाई देता है और रिश्तों को निभाने में वह पीछे रह जाते है।  शादियों को जल्द टूटना एक उदाहरण है।  आपसी ताल मेल और भरोसा रिश्तों में कम हो रहा है।

आजकल के परिवारों में बहुएं जब नए घर में प्रवेश करती है तो बहुत जगहों पर अपने सास ससुर की रोक टोक उन्हें अच्छी नहीं लगती है।  हालांकि दोनों पीढ़ियों को एक दूसरे के साथ सूझ बुझ के साथ चलना चाहिए।

दरसल समस्या नए और पुराने तरीके में भी हो जाती है। एक ही कार्य को दोनों पीढ़ी अलग अलग तरीके से करना चाहते है और वहीं जाकर मतभेद आरम्भ हो जाती है।युवाओ को यह समझना चाहिए कि उनके घर के बड़े उनकी भलाई चाहते है।  बड़ो को भी कोई भी बात या किसी तरह की इच्छा उन पर नहीं थोपना चाहिए। बड़ो को भी उन्हें कभी कभी छोड़ देना चाहिए ताकि उनके बच्चे शांत मन से उनके बातों को समझ सके। ऐसे में युवा वर्ग उनके बातों को समझेंगे और उलझेंगे नहीं।

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Essay on Generation Gap in Hindi | जनरेशन गैप पर निबंध | पीढ़ी अंतराल निबंध | Generation Gap Essay in Hindi | Generation Gap par nibandh

By: Ramesh Chauhan

Essay on Generation Gap in Hindi | जनरेशन गैप पर निबंध | प्रस्तावना

पीढ़ी अंतराल क्या है, भौतिक संसाधनों में अंतर | पीढ़ी अंतराल निबंध | generation gap essay in hindi | generation gap par nibandh, रहन-सहन में अंतर-, जीवन मूल्यों में अंतर, कौन भला और कौन बुरा, essay on generation gap in hindi।।पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी में अंतर पर हिंदी में निबंध video.

हर आने वाला नया दिन अपने साथ कुछ न कुछ नयापन लेकर आता है । समय परिवर्तनशील होता है । समय के साथ-साथ हमारे चारों ओर भौतिक संसाधन में अंतर आ जाता है इसी अंतर के कारण हमारे सोच में भी परिवर्तन आता है । हर व्यक्ति को अपने समय का हर चीज अच्छा लगता है । पुराने लोगों आज का नयापन अच्छा नहीं लगता तो आज के बच्चों को कल की पुरानी बातें अच्छी नहीं लगती । यही पसंद नापसंद का सोच एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में एक अंतर के रूप दिखाई देता है ।

यहाँ पढ़ें :  1000 महत्वपूर्ण विषयों पर हिंदी निबंध लेखन यहाँ पढ़ें :   हिन्दी निबंध संग्रह यहाँ पढ़ें :   हिंदी में 10 वाक्य के विषय

पीढ़ी अंतराल जिसे अंग्रेजी में जनरेशन गैप कहा जाता है । वास्तव में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों वैचारिक परिवर्तन है । हालांकि इन पीढ़ियों के बीच केवल विचारों में ही अंतर नहीं बल्कि रहन-सहन, खान-पान, पहनावा और भौतिक संसाधनों में भी अंतर आ जाता है। इन बदलावों के कारण दोनों पीढ़ियों के सोच में काफी अंतर आ जाता है । इस अंतर को ही पीढ़ी अंतराल या जनरेशन गैप कहते हैं । बाप के समय और बेटे के समय के परिवेश और विचारों में अंतर को पीढ़ी अंतराल कहते हैं ।

Essay on Generation Gap in Hindi

यहाँ पढ़ें : Essay on Youth in Hindi

आज और आज से 25-30 वर्ष पूर्व के भौतिक संसाधनों में काफी अंतर आ गया है । कृषि क्षेत्र को ही देखे तो पहले किसान जुताई के केवल अपने हल पर निर्भर था, इस कारण पशुओं का अधिक ध्यान रखता था । आज इसके टैक्टर सहित कई आधुनिक मशीनें आ गई है, इस मशीन के कारण पशुओं पर लोगों का ध्यान कम हो गया है इसलिए गोवंश का पशुधन अब मारा-मारा फिर रहा है ।

पहले मनोरंजन का प्रमुख साधन मंचीय कार्यक्रम, थियेटर, रेडियो था आज मोबाइल क्रांति के कारण सारा कुछ इंटरनेट और मोबाइल रह गया है । विस्तार से देखें तो जीवन के हर क्षेत्र में भौतिक संसाधनों में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई देता । इस परिवर्तन को पुराने लोग समाज के लिए नुकसानदेह बताते हैं तो नए लोग इसे जीवन स्तर में सुधार निरूपित करते हैं । यही तो पीढ़ी अंतराल है ।

यहाँ पढ़ें :   Essay on Leadership in Hindi

एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी के आते-आते उनके रहन-सहन में काफी बदलाव देखने को मिलता है । उदाहरण के लिए देखे तो पहले के लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते थे आज के लोग एकाकी परिवार में रहना पसंद करते थे ।

पहले के लोग अपनी संस्कृति और अपनी परंपरा का कठोरता से पालन करते थें , आज के लोग रूढ़िवाद और प्रगतिवाद के तराजू में तौल कर ही किसी बात को मानना है या नहीं इस बात का फैसला करते हैं । दोनों पीढ़ी के बीच खान-पान, पहनावा, सामाजिक मेल-मिलाप सब में अंतर देखने को मिलता है। हर व्यक्ति अपने समय की बातें को अपने अनुकूल और श्रेष्ठ समझता है । इसी श्रेष्ठता के टकराव में ही पीढ़ी अंतराल पैदा होता है ।

जहां पहली पीढ़ी धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं को अपनी संस्कृति मानकर पालन करते थे, उसे आज के लोग रूढ़िवाद और आधुनिकता में अंतर करते हुए छोड़ देते हैं। घर-परिवार, समाज गांव जहां पहले एक दूसरे को सहयोग देने की भावना प्रबल होती थी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में तन मन और धन से सहयोग करते थे इसमें आज कमी आ गई लोग केवल अपने काम अपने लाभ को ज्‍यादा महत्‍व देते हैं । एक दूसरे के सुख दुख में केवल फार्मेल्टी निभाते हैं ।

पीढ़ी अंतराल के इस वैचारिक द्वंद में कौन भला है और कौन बुरा है यह तय कर पाना आसान नहीं है । सृष्टि स्वयं परिवर्तनशील है, इसलिए समय के अनुसार तो बदलाव आयेगा ही आयेगा । कुछ बदलाव अच्छे होते हैं कुछ बदलाव बुरे भी होते हैं । विज्ञान की प्रगति से शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा में जो परिवर्तन हो रहा है वह निश्चित रूप से अच्छे हैं ।

जिस बदलाव से जीवन स्‍तर में सुधार हो, निर्धनता कम हो वह बदलाव अच्‍छे ही हैं । किन्‍तु जिस बदलाव से परिवार के बीच दूरियां बढ़ जाए, पारिवारिक संबंधों में खटास पैदा हो जाए, जिससे लोग एक दूसरे का सम्मान करना छोड़ दें मानवीय सहयोग छोड़ दे वह बदलाव निश्चित रूप से बुरे कहे जाएंगे।

बदलावों के क्रम संतुलन बनाना ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण बात है । हमारे परिवेश और विचार में बदलाव होते रहे हैं, होते रहेंगे किंतु इस परिवर्तन यदि कुछ नहीं बदलेगा तो वह है जीवन । मनुष्य का जीवन सुख और दुख के क्रम में सदा चलता रहा है चलता रहेगा । मनुष्य जीवन के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी मानवता । इस बदलाव में मानवता के गुणधर्म को हमें बचा कर रखना चाहिए । यह जीवन मूल्य है इस जीवन मूल्य को अक्षुण्ण रखना चाहिए।

अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर निबंध

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जनरेशन गैप पर भाषण

जनरेशन गैप/पीढ़ी का अंतर अपरिहार्य है क्योंकि अलग-अलग समय पर जन्मे लोग साथ आने के लिए बाध्य हैं। इसलिए हर किसी को इस जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर का सम्मान करना चाहिए और इसके साथ सामंजस्य बैठाने का प्रयास करना चाहिए नहीं तो हर जगह दिक्कत का सामना करना होगा। वर्तमान में जहां हमें यह देखने को मिलता है युवा नए ज़माने के साथ ताल से ताल मिला कर चल रहे हैं वहीँ दूसरी ओर यह भी देखने को मिलता है कि वे अपने बुजुर्गों से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए वास्तविक जीवन परिस्थितियों के सकारात्मक उदाहरणों देते हुए जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर पर कुछ भाषणों के माध्यम से उन्हें जानकारी देना ज़रूरी है।

जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर पर भाषण (Speech on Generation Gap in Hindi)

प्रिय छात्रों – आशा है कि आपने अपने समर कैंप का आनंद लिया होगा। विद्यार्थियों से यह सुन कर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है कि हमारे द्वारा आयोजित समर कैंप ने उनके अंदर रोमांच भर दिया और सभी को इससे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। अब आपकी कक्षा और पढ़ाई में आपका फिर से स्वागत है!

आपके कक्षा अध्यापक के रूप में अगर मुझे आपके साथ अपने अनुभव को शेयर करने का मौका मिले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि यह मेरे लिए एक मिश्रित अनुभव था। नई जगह, नई गतिविधियां, आत्मसात करने के लिए नई उमंग जिससे मुझे समृद्ध अनुभव की अनुभूति हुई। हालांकि कुछ स्तर पर शिक्षकों और छात्रों के बीच मतभेद देखने को मिले। यद्यपि आप सभी उच्च माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ते हैं और हम शिक्षक आपके साथ एक अच्छी समझदारी के स्तर को शेयर करते हैं।

तो आज इससे पहले कि मैं आपका नियमित कोर्स शुरू करूँ मैं जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर पर एक संक्षिप्त भाषण देना चाहता हूं। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि मुझे लगता है कि कई छात्रों को उनके शिक्षकों के संबंध में इस अंतर का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों मैं आपको बताता हूँ कि हम शिक्षक आपकी उम्र से यह समझते हैं और आपको क्या पसंद है और क्या नापसंद हैं लेकिन क्या आप अपने आसपास के लोगों, जो आपसे बड़े हैं, उनके अनुसार ख़ुद को ढालने की कोशिश करते हैं? शायद नहीं! उम्र के इस अंतर का सम्मान करना जरूरी है और अंततः पीढ़ी के उस अंतर का जो स्वाभाविक रूप से आता है जब विभिन्न आयु के लोग एक साथ मिलते-जुलते हैं। दो लोगों में एक-दूसरे के साथ हर समय मतभेद होना जरूरी नहीं है क्योंकि वे एक-दूसरे की सोच-विचार प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर सकते हैं और चीजों को देखने और अंत में एक दूसरे से कुछ सीखने की कोशिश कर सकते हैं।

पुरानी या पुराने समय से संबंधित सभी चीजें खराब नहीं होती हैं और जो भी नई या नए समय की चीज़ है वह अच्छी नहीं होती। किसी भी आम इन्सान को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत है।

जनरेशन गैप/पीढ़ी का अंतर कुछ ऐसा है जिसे आप कही भी जाएँ कभी नहीं छोड़ सकते हैं। आपको हर जगह विभिन्न आयु वर्ग और विचार के लोग मिलेंगे। यह अंतर केवल लोगों के बीच विचारों का संघर्ष है जो दो अलग-अलग पीढ़ियों से संबंध रखते हैं। कई मामलों में विचारों का संघर्ष दोनों नई और पुरानी सोचों के बीच का है। अनुभवी या जिन्हें आप उम्र के आधार पर बूढ़ा कहते हैं उन्हें आज की पीढ़ी के नौजवान युवक पुराने ढंग से सोचने वाले व्यक्ति समझते हैं।

इसके विपरीत आज की पीढ़ी के पास जीवन का ऐसा कोई अनुभव नहीं है जो उन्हें स्वाभाविक रूप से आवेगपूर्ण बनाता है बजाए उनके निर्णय या विवेक के जो उनकी प्रवृत्ति का पालन करता है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। अगर कोई परिवार कार से यात्रा कर रहा है तो बेटा, जो युवा है, वह तेजी से ड्राइव करेगा क्योंकि उसमें जोश है इससे उसे मज़ा आएगा । दूसरी ओर पिता या दादा धीमी गति और सावधानी पूर्वक ड्राइव करेंगे क्योंकि वे सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं के बारे में बेटे के मुकाबले अधिक चिंतित होंगे।

इसलिए दो अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के बीच सोचने में इस प्रकार का अंतर हमेशा मौजूद रहेगा। यह अंतर परिवार में और उन संस्थानों में देखा जाता है जहां युवा और बुज़ुर्ग लोग एक साथ रहते और काम करते हैं। ऐसी स्थिति को संभालने का सबसे अच्छा तरीका है यह है कि उम्र के अंतर का सम्मान करते हुए लोगों के साथ मिलनसार और धैर्यशील बने। बूढ़े परिपक्व होते हैं और हर जगह युवा पीढ़ी के अनुसार खुद को समायोजित कर सकते हैं। जब आप वयस्क हो जाएंगे तो मुझे यकीन है कि आप भी अपने दृष्टिकोण में बदलाव का अनुभव करेंगे और अपने बड़ों की सोच या उनके नज़रिए से चीजों को देखना शुरू करेंगे।

इसलिए स्थिति को थोड़ा सहज तरीके से लें और हर स्थिति में खुद को समायोजित करने की कोशिश करें – यह हर महान व्यक्तित्व का एक गुण है।

प्रिय मित्रों – मैं आप सभी का दिल से इस विशेष समारोह में स्वागत करता हूं जहां सभी आयु वर्ग के लोग स्वतंत्र रूप से एक दूसरे के साथ अपने जीवन के अनुभवों को शेयर कर सकते हैं।

हालांकि इससे पहले कि हम अपना सेश शुरू करें मुझे आज रात के हमारे विशेष अतिथि का स्वागत करने का मौका दीजिए जिनका नाम है श्रीमती सुनीता कश्यप जो एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक गैर सरकारी संगठन की अध्यक्ष हैं। युवा और वृद्ध, बच्चों और वयस्कों के बीच बढ़ता अंतर परिवार और विभिन्न संस्थानों में रिश्तों को प्रभावित कर रहा है। यह अंतर सोच की प्रक्रिया के संदर्भ में भी हो सकता है जिससे अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा चीजों को देखा जाता है। इसलिए हम यहाँ बातचीत और चर्चाओं के माध्यम से इस अंतर को कम करके पीढ़ी के अंतराल पर काबू पाने के लिए हैं।

इसके अलावा मैं इस विषय पर संवेदनशीलता के बारे में जागरूक होने में लोगों की सहायता के लिए इस विषय पर भी एक भाषण देना चाहूंगा। आज के युवाओं और बुजुर्गों के बीच के अंतर को पीढ़ी के अंतर के रूप में देखा जाता है। जहाँ एक ओर युवा अनुभवहीन, उग्र और आक्रामक होते हैं वहीँ दूसरी तरफ बुज़ुर्ग धैर्यशील, विवेकी और ज्ञानी होते हैं। वे अपेक्षाकृत शांत होते हैं और सावधानी के साथ काम करते हैं। जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर का यह तथ्य कुछ नया नहीं है क्योंकि यह काफी सालों से चला आ रहा है।

जो लोग पुरानी पीढ़ी से संबंध रखते हैं वे युवा पीढ़ी को हमेशा संदेह की नज़र के साथ देखते हैं। वे युवा पीढ़ी के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनका गुज़रा हुआ समय सबसे अच्छा समय था क्योंकि उस समय वे युवा थे और अपने बुजुर्गों का आदर करते थे तथा उनके प्रति अधिक आज्ञाकारी थे। वे ऐसा मानते थे कि अपने बुजुर्गों का अपमान करने से परिवार को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसके विपरीत आज के समय में युवाओं का मानना ​​है कि उन्हें वृद्धों पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए और उन्हें सब कुछ खुद करने के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए। युवा परिवार में अपने बुजुर्गों द्वारा दी सलाह का पालन करना नापसंद करते हैं।

नई और पुरानी पीढ़ी के बीच यह अंतर दिन-प्रतिदिन कई वजहों के कारण बढ़ रहा है। मुख्य रूप से आज के युवाओं का मानना ​​है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली असली स्पष्ट दुनिया में बहुत कम प्रासंगिकता रखती है। इसका उद्देश्य नौकरी प्राप्त करने की दिशा में नहीं है। इसका परिणाम यह निकलता है कि स्कूली शिक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें पता है कि वे किसी भी नौकरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं। वे बेहद निराश हो जाते हैं।

दूसरा जीवन की गति इतनी तेज हो गई है कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए थोड़ा सा समय ही निकाल पाते हैं। युवा और बुज़ुर्ग पीढ़ी के बीच समझ और अंतरंगता को विकसित करने के प्रयास कम किए जा रहे हैं।

तीसरा युवाओं को यह पता है कि वास्तव में हमारे देश की स्थिति क्या है। समर्पण, कर्तव्य, नैतिकता आदि पर चर्चाओं ने युवाओं को एक बड़ी दुविधा में डाल दिया है। आज के युवाओं को जो कुछ भी उनके बुजुर्ग उन्हें सिखाएंगे उसे वे आंख बंद कर स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। जब युवाओं को यह पता चलता है कि भ्रष्टाचार और राजनीति ने हर क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। जिसके वजह से वे हमेशा सामाजिक और आर्थिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहते हैं। इसलिए वे गंभीरता से समाज में बदलाव देखना चाहते हैं।

और मुझे उम्मीद है कि हमारी युवा पीढ़ी द्वारा लाया जाने वाला परिवर्तन केवल अच्छाई के लिए होगा और शायद हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार को दूर करने का प्रयास करेगा।

प्रिय सोसाइटी के सदस्यों – हमारी गोकुलधाम सोसाइटी के सचिव के रूप में मैं आप सभी का अपने सोसाइटी क्लब हाउस मीटिंग में स्वागत करता हूं!

सबसे पहले आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार! आज हमारे दिन-प्रतिदिन मुद्दों पर चर्चा करने के अलावा मैंने जनरेशन गैप/पीढ़ी के अंतर पर एक भाषण तैयार किया है जिसे मैं अब संबोधित करने जा रहा हूं। हाल ही की ख़बर जिसे हर कोई जानता है, जो वायरल हो गया था, उसमें कहा गया था कि एक युवा लड़के ने निराशा में अपने पिता को इतनी ज़ोर से मारा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह ख़बर सुन कर मुझे इतना अजीब लगा कि आज की युवा पीढ़ी के साथ क्या हो रहा है। क्या यह पूरी तरह से उनकी गलती है या फ़िर यह उनके माता-पिता की भी गलती है कि वे अपने बच्चों की अच्छी तरह से परवरिश करने में विफल रहे हैं और उनकी सोचने की प्रक्रिया को समझ नहीं सके?

चलिए एक माता-पिता होने के नज़रिए से ये उचित प्रश्न अपने आप से पूछें और हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और हमारे बच्चों की सोच के साथ अपनी सोच मिलाने की कोशिश करे। लेकिन साथ ही हमारे बच्चों में नैतिक मूल्यों और अच्छे नैतिक व्यवहारों का बीज बोना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें बचपन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि अपने बुजुर्गों का सम्मान करें और अपने से छोटों को प्यार दें। यदि हम अपने बच्चों से शारीरिक और भावनात्मक रूप से दूरी बनाए रखना शुरू करेंगे तो उनके जीवन को बहुत बड़ी भावनात्मक पीड़ा होगी और वे हर किसी के प्रति असंवेदनशील हो जाएंगे खासकर बड़ी उम्र के लोगों की ओर।

हमें इस अंतर को व्यापक और बड़ा करने की बजाए इसे कम करने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि यह पहले से ही बहुत व्यापक है जहाँ युवा और बुज़ुर्ग लोग पहले से ही एक दूसरे को ज्यादा परेशान किए बिना दो अलग-अलग दुनिया में रह रहे हैं। अगर आप इस पीढ़ी के अंतर को खत्म करना चाहते हैं तो बड़ों के रूप में हमें हमारे युवाओं और बच्चों के प्रति एक सहानुभूति दृष्टिकोण का सहारा लेना होगा और समझने की कोशिश करनी होगी कि उन्हें क्या पसंद है या क्या नापसंद है और साथ ही उनकी इच्छाएं और आकांक्षाएं भी जाननी होगी।

युवाओं को यह भी महसूस करना चाहिए कि उनके पास जीवन में कोई अनुभव नहीं है इसलिए अपने बुजुर्गों की बातें मानना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके पास उन अनुभवों का धन है जिनका लाभ आप उनसे उठा सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर और मूल्यवान बना सकते हैं। युवाओं को अपने बुजुर्गों की बात सुनना और उनकी ज़िंदगी के हर महत्वपूर्ण निर्णय पर उनकी सलाह लेनी चाहिए। यदि युवा किसी भी बिंदु से असहमत हैं तो वे शांति से और सम्मान के साथ अपनी राय रख सकते हैं।

अमेरिका और यूरोप जैसे विदेशी देशों में पीढ़ी का अंतर इतना बड़ा है कि युवा और बुज़ुर्ग लोग एक छत के नीचे रहना भी पसंद नहीं करते हैं। जब युवा पैसा कमाना शुरू करते हैं तो वे अपनी ज़िंदगी को स्वतंत्र रूप से शुरू करना चाहते हैं। इसी तरह बुज़ुर्ग लोग भी अपने पुराने घरों या पेंशनभोगी घरों में युवाओं से अलग रहते हैं। इसलिए यही पीढ़ी का अंतर संयुक्त परिवारों और घरों को टूटने की ओर ले जाता है।

हमें कोशिश करनी चाहिए कि स्थिति इस हद तक नहीं पहुंचे जहाँ भारतीय परिवार एक ही छत के नीचे अलग-अलग रहना शुरू कर दे। चलिए अपनी युवा पीढ़ी को अच्छी शिक्षा प्रदान करें ताकि वे अपनों से दूर न जाएं और उनसे जुड़े रहें। मैं केवल इतना ही कहना चाहता था!

धैर्यपूर्वक मेरी बात सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद!

प्रिय माता-पिता – पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में आपका स्वागत है! आप सभी को नमस्कार!

इस स्कूल का प्राचार्य होने की वजह से मैं इन बच्चों के प्रति जिम्मेदार हूं और मैं इनके भविष्य को सही रूप देने के लिए ईमानदारी से अपना प्रयास कर रहा हूं। इनकी शिक्षा के अलावा मैं पूर्ण रूप से इनके व्यक्तित्व का विकास सुनिश्चित करना चाहता हूं ताकि वे परिपक्व व्यक्तियों के रूप में बड़े हो सकें जो अपने नैतिक मूल्यों को बरकरार रख उनसे दूरी ना बनाएं।

तो यह कदम यानी माता-पिता और शिक्षकों के बीच इंटरैक्टिव सत्र आयोजित करना, इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक कदम है। कोई भी माता-पिता या शिक्षक नहीं चाहेंगे कि उनके बच्चों में उनका अनादर करना या अलगाव की भावना पैदा हो। हालांकि चाहे हम विश्वास करे या ना करें पर पीढ़ी का अंतर जिसे कहा जाता है वह एक सार्वभौमिक घटना है और दुनिया भर में लगभग हर परिवार में किसी ना किसी तरह इसे देखा जाता है।

इस तथ्य के बावजूद कि माता-पिता और बच्चे एक छत के नीचे रह रहे हैं या नहीं – वे एक अच्छा संवादात्मक स्तर साझा नहीं करते हैं या उनमें बहुत कम बातचीत होती है। बच्चों, उनके माता-पिता या बुजुर्गों के जीने का अपने अलग-अलग तरीके हैं। बच्चे अपने माता-पिता को सख्त, डराने-धमकाने और अनुशासनात्मक के रूप में देखते हैं जबकि माता-पिता अपने बच्चों को बहुत ढीट, बदतमीज़ और हिंसक देखते हैं। ऐसी स्थिति में रिश्ते कैसे अच्छे रह सकते हैं? या किस आधार पर परिवारों का गठन किया जा सकता है। जब व्यापक जनरेशन गैप/पीढ़ी का अंतर बढ़ता रहेगा तो यह कैसे मजबूत हो सकता है।

मुझे प्रतिदिन ऐसी कई ख़बरें सुनने को मिलती हैं जहाँ बाल दुर्व्यवहार की विभिन्न घटनाएँ या बच्चे अपने बड़ों के खिलाफ हिंसा भरा कदम उठाने में संकोच नहीं करते हैं। इतनी सारी खबरें पढ़ने को मिलती हैं जहां एक बेटा अपने पिता को संपत्ति के लिए मार देता है या बेटी आत्महत्या कर लेती है। ये भयावह ख़बरें वास्तव में हमारे समाज का प्रतिबिंब देती हैं और एक मजबूत संकेत देती हैं कि हमारा समाज या आने वाली पीढ़ी किस ओर बढ़ रही है। परिपक्व और अनुभवी व्यक्ति के रूप में हमें अपने समाज में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए और यह परिवर्तन केवल बड़े स्तर पर तभी लाया जा सकता है जब हम अपने परिवार को बदलना शुरू कर देते हैं तो हमारे परिवेश में रहने वाले युवाओं की मानसिकता बदलती है।

बड़ों के रूप में हमें हमेशा अपने बच्चों के प्रति कठोर नहीं होकर उनके दृष्टिकोण को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए। उनकी सोच हमसे अलग हो सकती है लेकिन हर समय गलत नहीं हो सकती। हमें उनके माता-पिता के रूप में उनके साथ सख्त व्यवहार करने की बजाए उनके दोस्त, मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए। हमें उनकी छोटी सी दुनिया का हिस्सा बनने की कोशिश करनी चाहिए जिसका वे स्वयं के लिए निर्माण करते हैं और उनकी इच्छाओं और तमन्नाओं के बारे में जानने का प्रयत्न करना चाहिए। अगर हम उन्हें समझने की दिशा में कदम उठाते हैं तो मुझे यकीन है कि वे इस अंतर को पूरा करने के लिए एक कदम उठाएंगे। इस तरह से हम अपने समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में प्रभावी ढंग से स्थानांतरित कर सकते हैं। पीढ़ी के अंतर का वास्तविक अर्थ नई और पुरानी पीढ़ी के बीच एक उच्च स्तर की असंगति है। यह दोनों पीढ़ियों की जिम्मेदारी है कि वे एक-दूसरे की राय का सम्मान करें और उसे समझें। तभी तो यह अंतर को कम किया जा सकता है और शांति और सद्भाव फिर से लाया जा सकता है।

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जनरेशन गैप पर निबंध – Essay on Generation Gap in Hindi

जनरेशन गैप पर निबंध – Essay on Generation Gap in Hindi

पीढ़ी का अंतर युवा और पुरानी पीढ़ियों के बीच दृष्टिकोण, विश्वास, मूल्यों और व्यवहार में अंतर को संदर्भित करता है। यह एक ऐसी घटना है जो पूरे इतिहास में मौजूद है और तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक परिवर्तन और अलग-अलग बचपन के अनुभवों जैसे विभिन्न कारकों का परिणाम है। पीढ़ी के अंतर का अध्ययन करना और समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बेहतर संचार को बढ़ावा देने, रिश्तों में दूरियों को पाटने और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देने में मदद करता है।

Table of Contents

जेनरेशन गैप के कारण

पीढ़ी के अंतर का एक प्रमुख कारण तकनीकी प्रगति है। युवा पीढ़ी प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित दुनिया में बड़ी होती है, जबकि पुरानी पीढ़ी को इन तीव्र परिवर्तनों के साथ तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। तकनीकी ज्ञान और निर्भरता में यह असमानता दो पीढ़ियों के बीच विभाजन पैदा करती है।

पीढ़ी के अंतर का एक अन्य कारण बचपन के अलग-अलग अनुभव हैं। पुरानी पीढ़ी संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले समय में बड़ी हुई है, जबकि युवा पीढ़ी के पास अवसरों और अनुभवों का अधिक अनुभव है। पालन-पोषण में यह अंतर विपरीत दृष्टिकोण और मूल्यों को जन्म देता है।

सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन भी पीढ़ी के अंतर में योगदान करते हैं। जैसे-जैसे समाज विकसित होता है, मानदंडों, मूल्यों और प्रथाओं में बदलाव आते हैं। पुरानी पीढ़ी पारंपरिक मान्यताओं और मूल्यों पर टिकी रहती है, जबकि युवा पीढ़ी नए विचारों को अपनाती है और मौजूदा मानदंडों को चुनौती देती है। सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों में यह टकराव पीढ़ी के अंतर को और बढ़ा देता है।

मूल्यों और दृष्टिकोण में अंतर

पीढ़ी का अंतर मूल्यों और दृष्टिकोण में अंतर की विशेषता है। पारंपरिक मूल्य, जैसे बड़ों के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक मानदंडों का पालन, पुरानी पीढ़ी द्वारा पसंद किए जाते हैं। दूसरी ओर, युवा पीढ़ी अक्सर व्यक्तित्व और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अपनाते हुए आधुनिक मूल्यों की ओर झुकती है।

प्रत्येक पीढ़ी अपनी मान्यताओं और विचारधाराओं का एक सेट विकसित करती है। ये पीढ़ी-विशिष्ट मान्यताएँ व्यक्तियों के दृष्टिकोण और व्यवहार को आकार देती हैं। पीढ़ियों के बीच इन विचारधाराओं के टकराव से संघर्ष और गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।

पीढ़ी का अंतर पालन-पोषण और पारिवारिक गतिशीलता में भी स्पष्ट है। पुरानी पीढ़ी अनुशासन और अधिकार पर जोर देते हुए पारंपरिक पालन-पोषण के तरीकों का पालन कर सकती है। इसके विपरीत, युवा पीढ़ी खुले संचार और समान भागीदारी को बढ़ावा देते हुए अधिक उदार दृष्टिकोण अपना सकती है। ये अलग-अलग पालन-पोषण शैलियाँ अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव पैदा करती हैं, जिससे पीढ़ी के अंतर में योगदान होता है।

संचार बाधाएं

पीढ़ियों के बीच संचार विभिन्न बाधाओं से प्रभावित होता है। प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया विभाजन पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल संचार पर बहुत अधिक निर्भर है, जबकि पुरानी पीढ़ी आमने-सामने बातचीत पसंद कर सकती है। ये अलग-अलग प्राथमिकताएँ प्रभावी संचार और समझ में बाधा बन सकती हैं।

भाषा और शब्दजाल में अंतर संचार बाधाओं में और योगदान देता है। प्रत्येक पीढ़ी समय के साथ अपनी भाषा और बोली विकसित करती है। जब विभिन्न पीढ़ियों के व्यक्ति अपरिचित शब्दों या वाक्यांशों का उपयोग करते हैं तो गलत व्याख्या और गलतफहमी हो सकती है।

पीढ़ी के बीच समझ और सहानुभूति की कमी के कारण गलत संचार भी आम है। प्रत्येक पीढ़ी के अपने अनुभव और दृष्टिकोण होते हैं, जिससे गहरे स्तर पर जुड़ना और जुड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

पारस्परिक संबंधों पर प्रभाव

पीढ़ी का अंतर पारस्परिक संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। कार्यस्थल में, पीढ़ी के अंतर के परिणामस्वरूप संघर्ष हो सकता है, क्योंकि विभिन्न पीढ़ियों के काम के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण और दृष्टिकोण हो सकते हैं। सहयोग और प्रभावी टीम वर्क में बाधा आ सकती है, जिससे उत्पादकता और नौकरी की संतुष्टि प्रभावित हो सकती है।

पीढ़ी के अंतर के कारण अंतरपीढ़ीगत मित्रता को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रुचियों, मूल्यों और जीवनशैली में अंतर बाधाएं पैदा कर सकता है, जिससे सार्थक संबंध विकसित करना और लंबे समय तक चलने वाली दोस्ती बनाए रखना कठिन हो जाता है।

पारिवारिक रिश्ते पीढ़ी अंतराल के प्रभाव से अछूते नहीं हैं। माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव आम बात है, क्योंकि उनके विश्वदृष्टिकोण और अपेक्षाएं अलग-अलग होती हैं। यदि प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं किया गया तो संचार टूटना, मूल्यों में टकराव और गलतफहमियां पारिवारिक गतिशीलता पर दबाव डाल सकती हैं।

जेनरेशन गैप को पाटना

हालाँकि पीढ़ी का अंतर चुनौतियाँ पैदा करता है, लेकिन समाज की भलाई के लिए इस अंतर को पाटना महत्वपूर्ण है। इसे प्राप्त करने में सहानुभूति और समझ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक पीढ़ी को दूसरे के अनुभवों, मूल्यों और दृष्टिकोणों को समझने और उनकी सराहना करने का प्रयास करना चाहिए। यह सक्रिय श्रवण और खुले दिमाग के माध्यम से किया जा सकता है।

पीढ़ी के अंतर को पाटने के लिए सार्थक संवाद के अवसर पैदा करना भी आवश्यक है। इसमें ऐसे स्थान बनाना शामिल है जहां विभिन्न पीढ़ियों के व्यक्ति एक साथ आ सकें, विचारों का आदान-प्रदान कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें। इसे परामर्श कार्यक्रमों, अंतर-पीढ़ीगत गतिविधियों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

निष्कर्ष में, पीढ़ी का अंतर एक प्राकृतिक घटना है जो युवा और पुरानी पीढ़ियों के बीच होती है। पीढ़ी अंतराल के कारणों को समझकर और उनका समाधान करके, हम बेहतर संचार को बढ़ावा दे सकते हैं, मजबूत रिश्ते बना सकते हैं और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा दे सकते हैं। समग्र रूप से व्यक्तियों और समाज के लिए इस अंतर को सक्रिय रूप से पाटना, विविधता को अपनाना और विभिन्न दृष्टिकोणों से सीखना महत्वपूर्ण है।

आइए हम पीढ़ी के अंतर को पाटने और एक सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने का प्रयास करें जहां प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव और योगदान को महत्व दिया जाए और सम्मान दिया जाए।

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Essay on Generation Gap for Students in 1000 Words

Essay on Generation Gap for Students in 1000 Words

In this article, we have published an Essay on Generation Gap for Students in 1000 words. It includes origin, various changes, generation gap indicators, how to solve this problem?

Table of Contents

Introduction

A generation gap happens when there is a noticeable difference in age (an entire generation) between two people. It often becomes a cause of conflict between parents and children. The generation gap is explained as the difference between views and ideologies between people belonging to two different generations. It can be a difference in political opinions, religious beliefs, or general attitude towards life.

Origin of Generation Gap

The principle of fractional generation gap was introduced in the 1961s. During that time, the younger generation was questioned about their parents’ beliefs and almost everything. They were also separated from their parents in nearly everything.

This included his religious beliefs, political views, moral values, relationship advice, and even his favorite music that he loved. Eminent sociologists such as Karl Mannheim looked at the differences between generations in how generations in different situations separated themselves from each other.

Generation Gap – An Interesting Concept

The generation gap is usually the cause of conflict between children and their parents. It is a fascinating concept. If there were no such difference in the world, then the world would have been quite different. Each generation establishes its fashion trends, talks in its preferred language, accelerates the development of science and technology and discovers new inventions.

Changes Due To Generation Gap

There have been many changes in society due to the generation gap, especially in India, where the joint family practice was already prevalent. Later the approach of separate family settlement started in India , and this is also a result of the generation gap.

Nowadays, people need privacy and want to live their life in their way, but the joint family practice is the main obstacle. In this way, many people are living separate families. Similarly, many changes occurring at different levels of society are the result of the generation gap.

Generation Gap Indicators

1. family system.

People belonging to the older generation lived in a joint family and believed in sharing and caring for things. However, this ideology deteriorated over time. The present generation wants autonomy, and very few want to follow the traditional way of living in a joint family. There has been considerable change in the overall lifestyle of the people.

2. Languages

Hindi spoken by people before pre-independence is quite different from today’s Hindi language and this change did not come suddenly. This change came into presence from generation to generation. Each generation creates a distinct identity of its style. This change in form consistently makes conversation between people belonging to different ages at home as well as the workplace sometimes tricky.

Attitude at Work

While the people of the older generation were good at taking directions from elders and loyal to their officers, these days people get bored of their jobs very quickly and try to change their jobs or quit within a few years. Huh. Generation Y people practice in modernization and want to share and apply their unique ideas to their officers rather than blindly following their guidelines.

Behavior towards women

Also read: Essay on women empowerment

Women of older generations were mostly confined to the home. He was seen only as a maid who should take care of the house while going out and working was the job of men. After all, with the change of time, the philosophy of the society towards women has also changed. Today women have the right to work in any field of their choice and work with men.

Generation Classification

It has been seen that different generations of people behave differently in different situations. Generations have been categorized into various names based on their attitudes, beliefs, opinions and all beliefs. The extension of this classification is as follows:

Conservative

These people associate with the groups who were born before 1945 and are above 70 years of age. It is said that these people follow the order well and are satisfied by working efficiently.

They like to share their experiences with younger generations and to be around those who appreciate their knowledge and expertise. Further, they are known to be loyal to their officer. Most of them spend their full activity and lives for the same organization and remain faithful to that organization.

Generation X

These people were born between 1946 and 1965. People of this generation are hard workers, but most are not familiar with the feedback. They also need money and publicity in the form of prizes. Since most of them don’t live comfortably, they make sure that their children get everything they want. They want them to be appreciated. They wish their officers and children to accept that they are valuable and necessary. The absence of all these things creates annoyance between them.

Generation Y

It is a society of people born between 1980 and 1999. Most of them have just entered the working age. This group is interested in engaging in meaningful work and is also forward in giving their feedback towards their work.

People of this generation are quite creative. They like to work with creative individuals and in places where their creativity is allowed to be explored. It is a source of inspiration for them and keeps them alive. It is a generation that gets bored very quickly. Unlike traditionalists, they change their jobs quite frequently.

How To Fill This Gap?

People of the older origination should understand that their children are born in another age and hence their mindset is different from them. Parents and grandparents need to pay attention to why their children are behaving differently and have different opinions, rather than blindly applying their rules and ideas. Parents should be their friends to understand their children’s moods. On the other side, children and youngers should tribute to their parents.

The Bottom Line

Humankind is continually evolving and hence the ideologies and approach of people belonging to different generations have changed. Although it is perfectly fine to have a different opinion from any other, sometimes it can also become a cause of conflict.

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What is the Generation Gap?

Generation Gap is a term given to the gap or age difference between two sets of people; the young people and their elders, especially between children and their parents. Everything is influenced by the change of time- the age, the culture, mannerism, and morality. This change affects everyone. The generation gap is an endless social phenomenon. Every generation lives at a certain time under certain circumstances and conditions. So, all generations have their own set of values and views. Every generation wants to uphold the principles they believe in. This is a problem that has continued for ages.

People born in different periods under different conditions have their views based on the circumstances they have been through. The patterns of life have been changing continuously according to time. Everyone wants to live and behave in his way and no one wants to compromise with his or her values and views. There has always been a difference in attitude or lack of understanding between the younger and older generations. This attitude has augmented the generation gap and it is becoming wider day by day. This gap now has started impacting our lives in the wrong way. 

It is always good to have a wide range of ideas, views, and opinions. It indicates how we are developing and advancing but sometimes this becomes worrisome when the views and ideas are not accepted by both generations. Parents create a certain image in their minds for their children. They want to bring up their children with values that they have been brought up with and expect their children to follow the same. Parents want children to act following their values, as they believe, it is for their benefit and would do well for them. 

Children on the other hand have a broader outlook and refuse to accept the traditional ways. They want to do things their way and don’t like going by any rulebook. Mostly, young people experience conflict during their adolescence. They are desperately searching for self-identity. Parents at times fail to understand the demands of this fast-paced world. Ultimately, despite love and affection for each other both are drained out of energy and not able to comprehend the other. Consequently, there is a lack of communication and giving up on relationships.

Different Ways to Reduce the Generation Gap

Nothing in the world can be as beautiful as a parent-child relationship. It should be nurtured very delicately and so it is important to bridge the gap between the two generations. It is time to realize that neither is completely right nor wrong. Both generations have to develop more understanding and acceptance for each other. Having a dialogue with each other calmly, with the idea of sorting out conflict amicably in ideas, changing their mindset for each other, and coming to a middle ground can be the most helpful instrument in bridging the gap between the two generations. 

Spending more time with each other like family outings, vacations, picnics, shopping, watching movies together could be some effective ways to build up a strong bond with each other. Both the generations need to study the ways of the society during their growing period and have mutual respect for it. To reduce the friction between the two generations, both parents and children have to give space to each other and define certain boundaries that the latter should respect. 

The generation gap occurs because society is constantly changing. It is the responsibility of both generations to fill this gap with love, affection, and trust. Both generations should have mutual respect for the views and opinions that they uphold and advance cautiously with the development of society.

Conclusion 

The generation gap is a very critical concept that occurs because of the different natures of every person. No one can end this generation gap but obviously, you can opt for some way in which it can be reduced. 

There should be efforts made by both sides to get a better relationship between two people. The generation gap may cause conflict between families but if you try to understand the thinking of another person and choose a path in between then you can get a happy living family.

No one wants to live in a tense environment and you always need your elders with yourself no matter what, they are the ones who care for you, they may have different ways of expressing their love and care for you and you might feel awkward but you need to understand them and their ways. Having your elders with you in your family is a blessing, you can talk with them and let them know your views and understand your ways to approach a particular situation.

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FAQs on Essay on Generation Gap

1. What do you Understand by Generation Gap?

The gap between the old people and the young is called the generation gap. The generation gap is not only the age difference between young people, their parents, and grandparents, but it is also caused by differences in opinion between two generations; it can be differences in beliefs, differences in views like politics, or differences in values. Therefore a generational gap is a conflict in thoughts, actions, and tastes of the young generation to that of older ones. We can have a good relationship even with a generational gap. All we need to do is understand others' way of thinking.

2. Why Does the Generation Gap Occur?

The generation gap occurs due to differences in views and opinions between the younger and older generation. Both generations want to uphold the principles they believe in. The reason for the generation gap is not only age but it can be because of reasons like:

Difference in beliefs

Difference in interests

Difference in opinion

In today's time, the generational gap has caused conflict between many families. The generational gap occurs because of the following reasons:

Increased life expectancy

The rapid change in society

Mobility of society

The generation gap can be reduced if we work on it with patience and understanding. So whatever may be the reason for the occurrence of the generation gap it can be overcome and a happy relationship can be built between two different people. 

3. How Should the Gap in the two Generations be Bridged?

The gap between the two generations should be bridged by mutual respect, understanding, love, and affection for each other. They both should come to a middle ground and sort things out amicably. Here are a few tips to help children to improve the differences because of the generational gap between their parents and them:

Try to talk more often even if you do not have the time, make time for it.

Spend more time with your parents regularly to develop and maintain your relationship. 

Make them feel special with genuine gestures. 

Share your worries and problems with them.

Respect is the most important thing which you should give them.

Be responsible 

Have patience and understand their perspective in every situation.

4. How Does the Generation Gap Impact Relationships?

Generation gaps disrupt the family completely. Due to a lack of understanding and acceptance, the relationship between the older and the younger generations become strained. Most families can not enjoy their family lives because of disturbed routines either they are too busy with work or other commitments, they are unable to spend time with each other. This increases the generational gap between children and parents. The child is unable to communicate his or her thoughts because of lack of communication and parents are unable to understand what the child is thinking; this causes more differences between them.

The generation gap can cause conflict between a relation of child,  parent, and grandparent. Because of the generational gap, there is a huge difference in the living pattern and pattern in which a person responds to a difficult situation. Elder people often take every situation on themselves and try to seek out the things for others but in today’s generation they believe in working only for themself they do not get bothered by others and they don’t try to seek things for others. But if we work to understand the differences and get a path out in between then the conflicts can be reduced and so the generational gap will not be that bothersome.

5. Where can I find the best essay on Generation Gap?

The generation gap can have a different point of view. Each person has a different way of thinking. Vedantu provides you with the best study material to understand the topic well and write about it. Vedantu is a leading online learning portal that has excellent teachers with years of experience to help students score good marks in exams. The team of Vedantu provides you with study material by subject specialists that have deep knowledge of the topic and excel in providing the best knowledge to their students to get the best results. Visit Vedantu now! 

पीढ़ी अंतराल पर निबंध

Essay On Generation Gap In Hindi: आज का हमारा यह आर्टिकल जिसमें हम पीढ़ी अंतराल पर निबंध के बारे में बात करने वाले हैं। इस आर्टिकल में आपको पीढ़ी अंतराल पर निबंध के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलने वाली है।

Essay On Generation Gap In Hindi

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पीढ़ी अंतराल पर निबंध | Essay On Generation Gap In Hindi

पीढ़ी अंतराल पर निबंध (200 शब्द).

पीढ़ी अंतराल को अंग्रेजी भाषा में जनरेशन गैप कहा जाता है और अंग्रेजी भाषा के इस जनरेशन गैप Word से भी आपको अंदाजा हो गया होगा कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आने वाले अंतराल को पीढ़ी अंतराल कहा जाता है।

अंतराल का मतलब यह है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों के दिमाग में पुरानी पीढ़ी से कुछ अलग बातें आती है। दूसरे शब्दों में इस पीढ़ी अंतराल शब्द को समझा जाए तो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों के मानसिक सोच में आने वाले बदलाव को जनरेशन गैप कहा जाता है।

आपने भी अक्सर देखा होगा कि जिस प्रकार से आपके पिताजी सोचते थे, उस प्रकार से आप नहीं सोच पाते हैं। आप उनसे कुछ अलग सोचते हैं और हो सकता है कि आने वाली अगली पीढ़ी आपसे भी कुछ अलग सोचने का प्रयास करेगी और ऐसा संभव है।

हर एक पीढ़ी में मानसिक सोच में निरंतर बदलाव आता रहता है और यह बदलाव जरूरी है। इसी बदलाव को पीढ़ी अंतराल कहा जाता है। उदाहरण के रूप में समझा जाए तो हमारे पूर्वज विषम परिस्थितियों में भी रहने की क्षमता रखते थे। लेकिन आज की पीढ़ी हर प्रकार की सुख सुविधा चाहती है।

पीढ़ी अंतराल पर निबंध (600 शब्द)

पीढ़ी अंतराल को हम लोग इंग्लिश में जेनरेशन गैप भी कह सकते हैं। यह पीढ़ी अंतराल अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच में एक टकराव बनता है। यदि पीढ़ी अंतराल की बात करें तो यह दो अलग-अलग पीढ़ियों से संबंधित लोगों के विचारधाराओं और विचारों को समझाया गया है।

आखिर जेनरेशन गैप क्या होता है?

इस शब्द की उत्पत्ति 1960 के दशक में हुई थी। उस समय बच्चे तथा माता-पिता के विचारों तथा विचार धाराओं के बारे में पूछा गया तो बच्चे लगभग सभी विचारधाराओं में अपने माता-पिता से अलग अलग विचार रखे हुए थे। इनमें से उनके धार्मिक विचारों राजनीति तथा नैतिक मूल्यों और रिश्ते चला यहां तक कि उनका मनपसंद म्यूजिक भी अलग अलग था।

एक सामान्य बात है, कई वर्षों से जारी है। पीढ़ी अंतराल अपने माता-पिता तथा दादा-दादी के विचारों के अंतराल को दर्शाता है।

दुनिया में यदि यह शब्द नहीं होता तो किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होती। इसी कारण से बच्चे और उनके माता-पिता को बीच में संघर्ष होता रहता है क्योंकि बच्चों के विचार अलग और उनके माता-पिता के विचार अलग होते हैं और इनके बीच में सामंजस्य बैठ नहीं पाता। यदि दुनिया में इस तरह का अंतर नहीं होता तो दुनिया काफी अलग होती है।

अगर जनरेशन गैप शब्द सबसे अधिक विकसित हुआ है। तो वह भारत में विकसित हुआ। यहां पर पहले के समय में लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते थे। लेकिन आजकल तो लोग अलग-अलग रहना ही पसंद करते हैं। इसी शब्द के कारण भारत में अलग परिवार बसाने की और धारणा प्रचलित होने लगी थी। यह भी एक पीढ़ी अंतराल है। इस समय लोग गोपनीयता की लालसा रखते हैं। उन्हें लगता है कि हमारी किसी भी बात दूसरे को पता ना चल पाए लेकिन ऐसा नहीं होता है।

आज के बच्चे

आजकल के बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बैठने के बजाय वह लोग स्मार्टफोन पर समय अधिक व्यतीत करना पसंद करते हैं। इसके कारण से परिवारों में कलह का कारण भी उत्पन्न होता है, क्योंकि इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में इतना समय ही नहीं मिल पाता कि अपने परिवार वालों को समय दे सकें। लेकिन जितना भी मिलता है, उतना समय अपने स्मार्टफोन को चलाने में व्यस्त कर देते हैं।

कुछ ऐसे भी काम होते हैं, जो आपको पसंद होते हैं। आपके माता-पिता को पसंद होते हैं। लेकिन आपके दादा-दादी को पसंद नहीं होते हैं। जिसके कारण वह आपसे बातचीत या आप से नफरत करना शुरू कर देते हैं। आपको लगता है कि यह मुझे पसंद नहीं कर रहे है, इसके एवज में आप उनसे बोलना ही बंद कर देते।

आजकल तो बच्चे अपने माता-पिता का किसी भी प्रकार की आज्ञा का पालन ही नहीं करते। यदि वह कहते हैं कि यह चीज गलत है, यह सही है तो उनकी बात का भरोसा ही नहीं करते और अपने मनपसंद कार्य को करना शुरू कर देते हैं। बाद में जब उन्हें पछतावा होता है तो काफी देर हो चुकी होती है।

जेनरेशन गैप का उदाहरण दें तो आजकल आपके आस-पास ही देखने को मिल जाएगा। क्योंकि कोई भी व्यक्ति संयुक्त परिवार में रहना पसंद नहीं करता है। वह चाहता है कि वह और उसका परिवार अकेले रहें जिससे अच्छा खाना और कपड़े पहन सकें, लेकिन वास्तव में जितना मजा संयुक्त परिवार में रहने पर आता है, उतना अकेले रहने पर नहीं लेकिन लोगों की सोच बिल्कुल बदल चुकी है। बस वह अपने परिवार से मतलब रखना चाहते हैं और किसी से नहीं। यह कैप पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है और यदि आप इसको बदलना चाहे तो बदल सकता है।

आने वाली पीढ़ी में लगातार मानसिक बदलाव होते रहते है। आज के समय में हर किसी को सुविधा की आवश्कता रहती है। लेकिन हमारे पूर्वज इन सुविधाओं के बिना भी रह सकते है।

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Rahul Singh Tanwar

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Generation Gap | Essay Writing

Generation Gap

Introduction – generation gap is a term, which is given to the gap between two generations, the younger generation, and their elders, especially between children and their parents. Everything is affected by the change of time, age, culture, manners, morality, etc. It is a fact that this difference affects everyone.

Context – The generation gap is an everlasting social phenomenon. Every generation lives at a certain time under certain conditions. So, different generations have their own system of values and views. And every side wants to uphold the principles they believe in. This problem has remained unresolved for ages.

A generation gap is a difference in attitude or lack of understanding between the younger and older generations. Today, everybody likes to live and behave in his own way. This attitude has enlarged the generation gap, which is becoming wider day – by – day.

Significance – It is now disrupting the family life completely. The elders look after the children and make all sorts of sacrifices to bring them up. Parents want children to follow their instructions as they believe it is for the benefit of children and would do them good. On the other hand, children face immense pressure of exams and cutthroat competition and think that parents know nothing about the demands of this fast-paced world. In the end, despite love and affection for each other, both are drained of energy and are unable to understand the other.

Conclusion – Unlike the West, in India, this problem is yet in the initial stages, but the gap has appeared and it is going to grow bigger day – by- day.” If you want happiness for a lifetime, help the next generation “, says a Chinese proverb. So, it is not only the responsibility of the younger generation but also of the elders to fill this gap with their love, affection, and trust. The problem, in fact, has grown and intensified due to the rise in the complexities of modern life.

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पीढ़ी अंतराल पर निबंध Essay on generation gap in hindi

Essay on generation gap in hindi.

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल जनरेशन गैप पर निबंध आप सभी के लिए बहुत ही हेल्पफुल है चलिए पढ़ते हमारे आज के इस निबंध को

Essay on generation gap in hindi

हमारे देश में सभी तरह के लोग रहते हैं देश के लोगों की जाति अलग अलग होती है, भाषाएं भी भिन्न-भिन्न होती हैं कुछ लोग बुजुर्ग होते हैं तो कुछ नौजवान होते है तो कुछ बच्चे। हमारे समाज में कई रूल्स होते हैं जिस वजह से हम समाज में अच्छी तरह से रह पाते हैं लोग उन रूल्स को निभाते हैं लेकिन जनरेशन गैप की वजह से इन सभी तरह के लोगों में एक अंतर होता है, उनकी सोच, कार्य करने की प्रणाली आदि में अंतर होता है इसे जनरेशन गैप कहते हैं अलग-अलग उम्र वाले लोगों में अलग अलग तरह के गुण होते हैं।

जनरेशन गैप की वजह से समस्याएं

इस जनरेशन गैप की वजह से हमारे देश और समाज में कई तरह का अंतर होता है देश कई तरह की समस्याओं से जूझता हैं पहले यहां परिवार में, समाज में सभी मिल जुलकर रहते थे लेकिन इस जनरेशन गैप की वजह से परिवार बिखरने लगे हैं। पहले के लोग जो अपने पूरे परिवार के साथ रहते थे लेकिन इस जनरेशन गैप की वजह से नए युवाओं की सोच बदल चुकी है हमारे बुजुर्गों, नौजवानों की सोच अलग-अलग है इसमें बहुत ज्यादा गैप है इस वजह से वह संयुक्त परिवार में नहीं रह पाते वह एकल परिवार में रहते हैं।

जनरेशन गेप की वजह से इस नई जनरेशन के लोग यानी नई युवा पीढ़ी हर समय कुछ नया सीखना चाहती हैं, नया करना चाहती हैं पहले जहां हमारे देश में हिंदी भाषा सबसे ज्यादा बोली जाती थी लेकिन आजकल के जमाने में वही हिंदी इंग्लिश की तरह बोली जाती हैं यानी हिंदी में भी कई शब्दों का इस्तेमाल इंग्लिश का होता है।

अगर पुरानी जनरेशन और नई जनरेशन के बीच में तालमेल बिठाया जाए तो पुरानी जनरेशन युवाओं की कुछ बातों को समझ ही नहीं पाएगी क्योंकि उनकी भाषा अलग हो चुकी है भाषा में अंग्रेजी शब्द आ चुके हैं जिस वजह से बुजुर्गों को उनकी बात समझने में परेशानी आती है। आज हम देखें तो नए जमाने में लोग तरह-तरह के फैशन करते हैं लड़कियां भी लड़कों की तरह पैंट शर्ट या जींस पहनने लगी है, बालों का स्टाइल भी उनका लड़कों की तरह होने लगा है जिस वजह से उनको पहचानना भी थोड़ा मुश्किल होता है।

पुराने जनरेशन के लोग इस बात को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाते वह नए लोगों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाते जिस वजह से हमारे समाज में कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, परिवार में लड़ाई झगड़े भी हो सकते हैं और परिवार बिखर जाते हैं। संयुक्त परिवार एकल परिवार में विभाजित हो जाते हैं पहले लड़को, लड़कियों और महिलाओं की अलग-अलग पोशाक थी लेकिन नई जनरेशन ने यह अंतर भी नहीं रहने दिया।

पुराने समय में महिलाओं को विशेष अधिकार नहीं थे वह अपने घर की चारदीवारी मे रहती थी और केवल खाना बनाने का कार्य करती थी वह जब भी किसी पुरुष के समक्ष आती थी तो पर्दा करके आती थी लेकिन नई जनरेशन इन बातों को नहीं मानते वह अपने हिसाब से जीवन जीते हैं।

आजकल के जमाने में महिलाएं पुरुषों के समान चल रही हैं वह भी पुरुषों की तरह बाहर का काम करना चाहती हैं और करती हैं वह किसी भी मामले में पुरुष से कम नहीं हैं और पर्दा प्रथा जैसी प्रथाएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। कुछ पुराने लोग इस पर्दा प्रथा को अच्छा समझते हैं तो नए लोग इसको अच्छा नही समझते हैं यह जनरेशन गैप ही है

इसलिए लोगों की सोच अलग-अलग है वह जैसा देखते हैं वैसा ही अपने चारों ओर देखना चाहते हैं उन्हें वही अच्छा लगता है अब इसमें सही कौन है और गलत कौन है यह समझना तो बहुत मुश्किल है लेकिन इतना जरूर है की पहले के लोग अपने माता पिता, गुरु की बहुत इज्जत किया करते थे जब भी वह अपने माता पिता या गुरु से मिलते हैं तो आदर सम्मान से मिलते थे, उनके चरण स्पर्श करते थे लेकिन आजकल की जनरेशन इन सबसे भटकती जा रही है।

आजकल के बहुत ही कम युवा हैं जो इस तरह की बातों को मानते हैं पहले जहां लोग किसी व्यक्ति के मिलने पर नमस्ते राम-राम किया करते थे लेकिन आजकल की जनरेशन किसी से मिलने पर यहां तक कि अपने बड़े बुजुर्गों से भी मिलने पर हाय, हेलो करते हैं कहने का मतलब यह है कि नई जनरेशन अंग्रेजी भाषा को अपना रही है वह अपने आपको विदेशों की तरह बदलना चाहती हैं।

पहले की जनरेशन ने कभी भी यह नहीं सोचा था कि नए जमाने में मोबाइल फोन जैसा यंत्र आएगा पुराने जनरेशन के लोगों को तो मोबाइल सही से चलाना भी नहीं आता क्योंकि उन्होंने अपने बचपन में यह देखा तक नहीं तो उनको समझने में थोड़ा समय लगता लेकिन नई जनरेशन वाले बच्चे भी मोबाइल सही तरह से चलाने लगे हैं क्योंकि वह अपने बचपन से ही मोबाइल फोन को चलाते हुए देखते हैं तो सीखना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं होती।

नई जनरेशन और पुरानी जनरेशन में गैप भले ही आज कल के युग में थोड़ा बहुत हो लेकिन अगर हमने इस आधुनिक युग में अपने पुराने रीति रिवाज और संस्कारों को भूलने की कोशिश की तो वास्तव में हम हमारे देश को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे, उसकी संस्कृति को भूल कर विदेशों की संस्कृति को अपनाकर विदेश की ही तरह बनकर रह जाएंगे हमें चाहिए कि हम भले ही इस जनरेशन गैप को दूर न कर सके लेकिन अपने संस्कारों को हमेशा याद रखें और जीवन में आगे बढ़ते जाएं।

poem on generation gap in hindi

तुझमे मुझमे है यह अंतर

ना होगा खत्म ये अंतर

खुशी खुशी से फिर भी सीख ले

जीवन का यह मंतर

सम्मान बड़ो का करले

अब ना संस्कारो को भूलता जा

generation gap quotes in hindi

वास्तव में जनरेशन गैप एक तरह से लोगो मे सोच का अंतर होता है।

अगर हम जीवन में समझदारी से काम लें तो इस जनरेशन गैप के बावजूद भी हम अपने परिवार में अच्छी तरह से रह सकते हैं।

जनरेशन गैप भले ही हो लेकिन हमें हमारे बुजुर्गों, माता पिता और गुरु का सम्मान करना कभी भी नहीं भूलना चाहिए।

हमें हमेशा अपने संस्कारों को याद रखना चाहिए उन्हें बिल्कुल भी नहीं भूलना चाहिए।

हमें हमारे देश की भाषा मातृभाषा हिंदी को ही बढ़ावा देना चाहिए।

भले ही आजकल की जनरेशन पहले के लोगों से कुछ बातों में आगे हैं लेकिन वह हर बात में आगे नहीं हो सकती।

जनरेशन गैप के बारे में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग धारणाएं हो सकती हैं।

हमें अपने जनरेशन गैप को कभी भी इतना बड़ा नहीं बनाना चाहिए कि इससे हमारे समाज में और परिवार में परेशानी खड़ी हो।

हम भले ही नई जनरेशन के हो तो भी हमें हमेशा बुजुर्गों के बताए हुए सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलना चाहिए इसी से हम आगे बढ़ सकते हैं।

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